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लोकरूचि जन्माष्टमी मथुरा तीन अन्तिम मथुरा

बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य ज्ञानेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि तीन सितम्बर की रात 12 बजे के बाद एक नियत समय में मंदिर में मंगला के दर्शन होते हैं। तीर्थयात्रियों को वर्ष में एक बार ही ठाकुर के मंगला के दर्शन देखने को मिलते हैं। वृन्दावन के राधाश्यासुन्दर, गोपीनाथ, राधा बल्लभ,कृष्ण बलराम मंदिर, गोविन्ददेव, मदनमोहन,गाकुलानन्द में भी विशेष प्रकार से जन्माष्टमी मनाई जाती है। रंग जी मंदिर में तो जन्माष्टमी के अगले दिन लट्ठे का मेला लगता है जिसमें लगभग 50 फीट ऊंचे लटठे पर पहलवान उस समय बिना किसी सहायता के चढते हैं जब कि लट्ठे में ऊपर से तेलमिश्रित पानी लगातार डाला जाता है। जो पहलवान सबसे पहले खंभे के शिखर तक पहुंच जाता है वही विजयी होता है। इसके बाद मंदिर में मृदंग लूट भी होती है।
गोकुल में जन्माष्टमी अगले दिन यानी इस बार चार सितंबर को नन्दोत्सव या दधिकांना के रूप में मनाई जाएगी। यहां के मशहूर प्राचीन राजा ठाकुर मंदिर के सेवायत भीखू जी महराज के अनुसार श्रीकृष्ण के गोकुल आने की खुशी में गोकुल में हल्दी मिश्रित दही की एक प्रकार से होली होती है तथा लोग श्रीकृष्ण के आगमन पर नृत्य करते है। शहनाई वादन भी होता है। राजा ठाकुर मंदिर में लगभग एक घंटे तक नन्दोत्सव जन्माष्टमी के अगले दिन सुबह होता है जिसमे ठाकुर पालना में विराजते हैं तथा मिठाई, पकवान, फल, वस्त्र, पैसे आदि लुटाए जाते हैं और श्रद्धालुओं पर हल्दी मिश्रित दही डाला जाता है। मंदिर से शोभायात्रा चैक के लिए जाती है जहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ लोग एक दूसरे पर हल्दी मिश्रित दही डालकर श्रीकृष्ण जन्म की बधाई देते हैं। महाबन, नन्दगाव, गोवर्धन, राधाकुड में भी जन्माष्टमी अलग अलग तरीके से मनाई जाती है।
नन्देात्सव के अगले दिन यानी 5 सितम्बर को वृन्दावनवासी निराले तरीके से जन्माष्टमी मनाते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव समिति के आयोजक कृष्ण गोपालानन्ददेव गोस्वामी के अनुसार सामूहिक नगर संकीर्तन यात्रा गोविन्द घाट से यमुना पूजन के बाद शहर के विभिन्न मार्गों से होकर राधाश्यामसुन्दर मंदिर वृन्दावन में समाप्त होगी तथा इसके बाद विशाल भंडारा होगा। कुल मिलाकर ब्रज की जन्माष्टमी का अलौकिक आनन्द ऐसा होता है कि यहां पर भक्ति भी नृत्य करने लगती है और ब्रजभूमि कृष्णमय हो जाती है।
सं भंडारी
वार्ता
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