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शब्बीरपुर हिंसा के तीन आरोपियों पर लगी रासुका न्यायालय ने की खारिज

सहारनपुर, 05 सितंबर (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्डपीठ ने शब्बीरपुर की जातीय हिंसा में राजपूत पक्ष के तीन आरोपियों पर लगी रासुका को खारिज कर दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपेंद्र अग्रवाल ने बुधवार को यहां बताया कि बड़गांव थाने के गांव अम्बेहटा चांद निवासी तीन युवकों सोनू, राजू और सुधीर को जिला प्रशासन ने 7 सितंबर 2017 को रासुका में निरूद्ध किया था।
5 मई 2017 को शब्बीरपुर गांव में महाराणा प्रताप के जुलूस को लेकर अनुसूचित जाति और राजपूत बिरादरी में संघर्ष हो गया था, जिसमें एक राजपूत युवक की मौत हो गई थी। 23 मई 2017 को मायावती शब्बीरपुर रैली में आईं थीं। रैली से लौटते अनुसूचित जाति के लोगों का रास्ते में दूसरे पक्ष से टकराव हो गया था। जिसमें सरसावा के एक हरिजन युवक की मौत हो गई थी। उस मामले में अम्बेहटा चांद के तीन युवकों को आरोपी बनाया गया था।
इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। जहां मंगलवार को न्यायमूर्ति बालाकृष्णन नारायण और अरविंद कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने तीनों युवकों पर लगी रासुका की कार्रवाई को रद्द कर दिया। रणदीप पुंडीर एडवोकेट ने बताया कि इन तीनों युवकों को पहले ही अन्य मामलों में जमानत मिल गई थी और अब रासुका खत्म हो जाने से वे जल्द ही रिहा हो जाएंगे।
सं तेज
वार्ता
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