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वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के करीब, मंदिरों एवं कालोनियों में घुसा पानी

वाराणसी, 05 सितंबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है तथा प्रति घंटा एक सेंटीमीटर की रफ्तार से इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है।
विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, राजा हरिश्चंद्र और असि समेत कई गंगा घाटों की ऊपरी सीढ़ियां जलमग्न हो गईं हैं। गंगा में नावों का व्यवसायिक परिचलन बंद कर दिया गया है। गंगा एवं सहायक नदी वरुणा के निचले इलाके मे करीब एक किलोमीटर के दायरे में बसी कई कॉलोनियों में पानी घुस गया है जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र के सूत्रों के अुनसार, बुधवार अपराह्न दो बजे जलस्तर 69.26 मीटर दर्ज किया गया तथा औसतन एक सेंटीमीटर की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है।
उन्होंने बताया कि खतरे का चेतावनी स्तर 70.26 मीटर है जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है। वर्ष 1978 में अधिकतम जलस्तर 73.90 मीटर दर्ज किया गया था, जब वाराणसी का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था।
लगातार जलस्तर बढ़ने से गंगा घाटों का अपसी संपर्क टूट गया है। गंगा नदी के किनारे स्थित कई मंदिरों और कॉलोनियों में पानी घुस गया है। ऐतिहासिक दशाश्वमेध एवं असि समेत घाटों की ऊपरी सीढ़ियों तक गंगा का पानी पहुंचने के कारण पूजा-अर्चना के अलावा शवदाह संस्कार करने में भी परेशानियों का सामना पड़ रहा है।
दशाश्वमेध घाट के आसपास नदी किनारे स्थित कई शिवालयों में पानी घुस गया है जिससे श्रद्धालु उन मंदिरों में पूजा नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा मणिकर्णिका एवं हरिश्चंद्र घाट पर शवों के दाह संस्कार करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पर शव दाह छत पर करना पड़ रहा है। घाट पर ऊपर तक पानी भरने के कारण शव दाह के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
बीरेन्द्र तेज
जारी वार्ता
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