Wednesday, Sep 26 2018 | Time 20:14 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • ओलम्पिक मेजबानी के लिए तैयार हो रही है अमरावती स्पोटर्स सिटी
  • राजीव रौतला ने जी बी पंत विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाला
  • त्रिपुुुरा के धलाई जिले में मलेरिया का प्रकोप बढ़ा
  • आधार पर शीर्ष न्यायालय का फैसला आम लोगाें के लिए बड़ी राहत :ममता
  • आभूषण, रिफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, फुटवेयर होंगे महँगे
  • ---
  • धार्मिक मेले के दौरान जहरीला दाना खाने से 30 मोर मरे
  • खेल उपकरणों की खरीद के लिये 50 करोड़ रूपये मंजूर
  • आतंकी फंडिंग मामला: दिल्ली से तीन गिरफ्तार, डेढ करोड रूपये बरामद-एनआईए
  • दूरबीन लेकर ढूंढने जैसी कांग्रेस की स्थिति-शाह
  • हरियाणा में खेल उपकरणों की खरीद के लिये 50 करोड़ मंजूर
  • झारखंड सरकार का पर्यावरण अनुकूल विकास पर जोर : रघुवर
  • हाईकोर्ट ने स्टेशनों पर भीख मांगने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने को कहा
  • व्यापमं मामले में कलमनाथ, दिग्विजय, सिंधिया पर प्रकरण दर्ज करने के निर्देश
राज्य » उत्तर प्रदेश Share

नाईक ने किया राष्ट्रीय पुस्तक मेला 2018 का उद्घाटन

लखनऊ, 05 सितम्बर(वार्ता) उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने बुधवार को यहां रविन्द्रालय प्रागंण में आयोजित ‘राष्ट्रीय पुस्तक मेला 2018’ का उद्घाटन किया।
श्री नाईक ने इस अवसर पर कहा कि ‘मैंने पुस्तक मेला उद्घाटन कार्यक्रम मांग कर लिया है। समाचार पत्रों में पढ़ा कि आयोजक ने राज्यपाल को उद्घाटन के लिये आमंत्रित किया है। मुझे उनका पत्र नहीं मिला जबकि राजभवन काफी करीब है। मैंने आयोजक को फोन किया।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, पिछले चार वर्षों से मैं मेले का उद्घाटन कर रहा हूँ। पांचवें मेले में न आता तो मेरा रिकार्ड टूट जाता। अगले वर्ष मैं राज्यपाल रहूं न रहूं पर मेरी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!! मेरी उपस्थिति दर्ज कराती रहेगी। मेरी मराठी पुस्तक का पांच भाषाओं हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और संस्कृत में अनुवाद हो चुका है तथा निकट भविष्य में यह जर्मन, अरबी, फारसी एवं सिंधी में भी प्रकाशित होगी।’
श्री नाईक ने कहा कि लखनऊ की विशेषता है कि यहाँ 8 राज्य विश्वविद्यालय हैं, 5 निजी विश्वविद्यालय हैं, एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है तथा 1,200 महाविद्यालय हैं। ऐसे में पुस्तक मेला ज्ञान बढ़ाने में सहायक है। पुस्तकें खरीदकर पढ़ें क्योंकि उससे लेखक और प्रकाशक दोनों को चेतना और उत्साह मिलता है। सांस्कृतिक जीवन में पुस्तकों का बहुत महत्व है। कुछ लोगों का कहना है कि पठन संस्कृति को ग्रहण लग रहा है, जबकि वास्तव में किताबें कभी अकेलापन नहीं महसूस होने देती हैं।
उन्होंने कहा किपुस्तक मेले में अलग-अलग भाषाओं की किताबें मिलती हैं। भाषाएं एक-दूसरे को जोड़ती हैं। यह पुस्तक मेले में देखने को अच्छे ढंग से मिलता है। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला ज्ञान बढ़ाने में सहायक होता है।
तेज
जारी वार्ता
image