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दारागंज घाट पर पानी भरने से सडकों पर हो रहे अंतिम संस्कार

इलाहाबाद,06 सितम्बर (वार्ता) उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद गंगा और यमुना के जलस्तर में वृद्धी होने के कारण दारागंज घाट पर होने वाले अंतिम संस्कार अब सड़कों पर हो रहे हैं।
बाढ़ के कारण दारागंज स्थित शमशान घाट पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। इसके चलते दूर दराज से आने वाले पार्थिक शरीर का अंतिम संस्कार गंगा तट से दूर सडकों पर किया जा रहा है।
दूर दराज से यहां शवदाह करने आने वाले लोगों को बाढ़ के पानी से घाट जलमग्न होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाहाबाद के ममफाेर्डगंज से पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने पहुंचे बद्री प्रसाद का कहना है कि पहले शवों का अंतिम संस्कार गंगा के बिल्कुल किनारे किया जाता था लेकिन अब बाढ के कारण यह संभव नहीं हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इस समय शव दाह के लिए लकडियां भी गीली हैं जिससे उन्हें जलाने में बडी परेशानी हो रही है। लकड़ी गीली होने से हो रही परेशानी से बचने के लिए बिजली के शवदाह में क्यों नहीं ले जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह गरीब लोगों के लिए है। जिसका भरापुरा परिवार है वह अपने मृतक के लिए कभी भी बिजली वाले शवदाह का उपयोग नहीं करता।
घाट पर दुकान चलाने वाले सुरेश चन्द्र का कहना है कि सड़क पर अंतिम संस्कार होने के कारण लोगों को आवगमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि तब स्थिति और कष्टकारी हो जाती है जब कई शवों को एक साथ जलाया जाता है और उनके परिजनों की भीड़ से स्थानीय लोगों के आवगमन में परेशानी होती है।
दारागंज की रहने वाली निधि मिश्रा ने बताया कि यही स्थान है जहां लोग परेशानियां उठाने के बावजूद भी किसी से शिकायत नहीं करते। चुप-चाप मैनेज कर आते जाते हैं। किसी को कोई परेशानी नहीं होती। शवों के घाट पर जलने से उठने वाली गंध से आसपास रहने वाले लोगों को तकलीफ जरूर होती है लेकिन कुछ किया भी तो नहीं जा सकता।
उन्होंने बताया कि कम से कम 30-40 शव प्रतिदिन यहां जलाये जाते हैं। कभी कभी तो इससे भी अधिक हो जाते हैं। कई बार तो तेज हवा चलने से जलते शव की राख उडकर घाट पर रहने वाले लोगों के घरों में आ जाती है। अब तो यह रोजमर्रा की बात हो चुकी है।
दिनेश तेज
वार्ता
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