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सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड में अब पानी से त्राहि त्राहि

झांसी 06 सितम्बर (वार्ता) अक्सर पानी की जबरदस्त किल्लत और सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड में इस साल बारिश कहर बन कर बरसी है। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने से गांव देहातों के साथ साथ शहरों में भी जबरदस्त जलभराव के कारण बाढ जैसे हालात पैदा हो गये हैं।
कई वर्षों बाद हुई इस तरह की बरसात से पहले तो लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली लेकिन लगभग चालीस दिनों से लगातार हो रही बरसात ने अब हालात काफी खराब कर दिये हैं। जिला प्रशासन भी शायद इस तरह की जबरदस्त बरसात से अंजान था और न ही ऐसे हालात का सामना करने को तैयार था। नतीजन अधिकतर इलाकों में लोगों के घरों यहां तक कि सरकारी कार्यालयों तक में जलभराव होने से बारिश का पानी घुस गया।
पानी की मार से जूझ रहा बुंदेलखंड का किसान पहले तो बारिश से काफी खुश था लेकिन लगातार हो रही बरसात ने अब उनके माथे पर भी परेशानियों की शिकन ला दी है। खरीफ की फसल के लिए पानी की जरूरत तो थी लेकिन लगातार हो रही बरसात के चलते खेतों में पानी भर गया है , जिसके कारण इस क्षेत्र की शत प्रतिशत खरीफ फसल बरबाद हो गयी है।
किसान नेता गौरीशंकर बिदुआ ने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र दलहन और तिलहन का क्षेत्र है। खरीफ काल में किसानों ने मूंग, मूंगफली, तिल और उड़द की फसल बोयी थी जो लगातार बरसात के कारण खेतों में लबालब पानी भर जाने से पूरी तरह बरबाद हो चुकी है। यह क्षेत्र धान की फसल का नहीं है लेकिन जिन किसानों के पास निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था थी उन्होंने धान की बुआई भी की थी । इस भारी बारिश के कारण अब वह धान की फसल भी पूरी तरह से चौपट हो गयी है क्योंकि धान की फसल 10 प्रतिशत पानी में डूबे तो फसल के लिए अच्छा होता है लेकिन इस बार बरसात में फसल पूरी तरह से पानी में डूब गयी और चौपट हो गयी।
उन्होंने कहा “ पहले हम पानी की किल्लत से मर रहे थे और अब पानी में डूबकर मर रहे हैं। किसानों को इस बारिश से किसी तरह की राहत नहीं मिली है । लगातार पानी और बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे किसानों को बारिश ने भी रूला दिया है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बारिश का यह बेहद उपयोगी पानी बुंदेलखंड की धरती से नदियों के माध्यम से यूं ही बहकर समुद्र की ओर चला गया है इस पानी का संग्रह हम नहीं कर पाये हैं ।
किसान का कहना था कि बांधों में जो पानी है वह उनकी क्षमता से काफी कम है क्योंकि कई वर्षों से बांधों की तली में लगातार सिल्ट के जमा होने से उनकी जलग्रहण क्षमता काफी घट गयीे है। हम लगातार इस क्षेत्र के बांधों से सिल्ट को निकालने के लिए प्रशासन से मांग करते रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनवायी नहीं हुई और नतीजा यह है कि वर्षा जल से जल्दी ही बांध भर गये और अतिरिक्त पानी बेतवा में छोड दिया गया जो यूं ही बहकर चला गया।”
श्री बिदुआ ने कहा कि प्रशासन या सरकार ने बारिश से पहले इस वर्षाजल के संचय के लिए बावडियां ,तालाब या बंधी आदि नहीं बनायीं । जैसे बारिश इस साल हुई वैसी बारिश पिछले 20 से 22 वर्षों से नहीं हुई थी लेकिन बारिश का यह शुद्ध जल हमारे हाथ से निकल गया। अगर हम इसी पानी का संचय कर पाते तो अनावृष्टि काल में इसी पानी का इस्तेमाल खेती में किया जा सकता था। इस बार की बारिश इसी मायने में अच्छी और महत्वपूर्ण रही कि बारिध धीमे धीमे और लगातार लंबे समय तक हुई। इस कारण वर्षाजल रिसकर भूमिगत जल के स्तर को ऊंचा करने में मददगार साबित होगा। इस बारिश के बाद अनावृष्टिकाल में भूमिगतजल का स्तर ऊंचा रहने की उम्मीद की जा सकती है।
सोनिया प्रदीप
वार्ता
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