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ना होते एलबीएच कोच तो हादसे में जाती कई जाने

कानपुर, 20 अप्रैल (वार्ता) रेलवे अधिकारियों का दावा है कि दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग पर स्थित कानपुर के रूमा में शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त हुयी पूर्वा एक्सप्रेस में अगर एलबीएच कोच ना होते तो हादसे में हताहतों की तादाद में खासी बढ़ोत्तरी हो सकती थी।
हावड़ा से नई दिल्ली जा रही 12303 पूर्वा एक्सप्रेस के 11 डिब्बे देर रात 1254 बजे पटरी से उतर गये थे। इस हादसे में किसी भी यात्री की मौत नहीं हुई जिसके पीछे ट्रेन में लगे लिंके हॉफमैन बुश (एलबीएच) कोच थे। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि एलबीएच कोच की वजह से हादसा खतरनाक नहीं हुआ अगर साधारण कोच होते तो वर्ष 2016 में कानपुर देहात के पुखरायां में हुये रेल हादसा जैसा नजारा देखने को मिल सकता था।
गौरतलब है कि 19 नवम्बर 2016 की रात कानपुर देहात के पुखरायां के पास इन्दौर पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी जिसमें करीब 150 यात्री मौत के गाल में समा गये थे और करीब 250 यात्री घायल हुए थे।
उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि पूर्वा एक्सप्रेस में लिंके हॉफमैन बुश (एलबीएच) कोच लगे हुए थे। इसीलिए हादसे में करीब 24 यात्री मामूली रुप से घायल जरुर हुए लेकिन जनहानि नहीं हुई। उन्होने बताया कि पिछले रेल हादसों से सबक लेते हुये रेलवे ने अब पुराने आईसीएफ डिजाइन कोच के उत्पादन पर रोक लगा दी है। इसकी जगह रेल यात्रा सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए एलबीएच डिजाइन के कोच का उपयोग किया जा रहा है। यह कोच ना सिर्फ वजन में हल्का होता है बल्कि इसके पास बेहतर ढुलाई के साथ-साथ हाई स्पीड क्षमता भी है।
सं प्रदीप
जारी वार्ता
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