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अपराध-भर्ती गिरोह दो अंतिम लखनऊ

श्री सिंह ने बताया गिरोह सरगना माे0 शमीम सिद्दकी काफी समय से अलग-अलग जगहाें पर फर्जी चिटफण्ड कम्पनी, फर्जी इन्श्योरेन्स कम्पनी आदि का संचालन कर तमाम लाेगाें काे करोड़ों रूपये का चूना लगा चुका हैं। इधर कई वर्षो से यह अपना बेस इलाहाबाद हाईकोर्ट एंव उसके आस पास बना रखा था, जिससे अपने गिरोह के माध्यम
से आर्टिकल 229 के माध्यम से हाईकाेर्ट में विभिन्न पदों पर पात्रता के आधार पर सीधी भर्ती के नाम पर सही विज्ञापन काे दिखाते हुए फर्जी भर्ती करने का काम किया एंव बेराेजगार युवकों से 50 कराेड़ से ज्यादा की ठगी कर चुका है। इस जालसाज ने प्रयागराज के साेरांव कस्बे में देवास मोटर्स, देवास एसेसरीज और देवास यामहा जैसी एजेन्सी खोलने के साथ साथ तमाम जमीन चल-अचल सम्पत्ति खरीदकर अकूत सम्पत्ति अर्जित किया हैं।
उन्होंने बताया कि पूछताछ पर मो0 शमीम सिद्दकी ने बताया कि वह इलाहाबाद हाईकाेर्ट के काेआपरेटिव सोसायटी में एकाउण्टेण्ट पद पर वर्ष 1978 से तैनात था, लेकिन काेर्ट कैम्पस से बाहर वह अपना परिचय लाेगाें को डिप्टी रजिस्ट्रार हाईकोर्ट इलाहाबाद के रूप में देता था। इसी बात के झांसे में आकर लाेग उससे जुड़ने लगे।
श्री सिंह ने बताया कि राघवेन्द्र सिंह ने पूछताछ पर बताया कि वह वर्ष 1999 में असिसटेन्ट प्राॅक्टर के पद पर एमएनएनआईटी तेलियरगंज प्रयागराज में नियुक्त हुआ था तथा वर्ष 2009 से स्टूडेन्ट एक्टीविटी एण्ड स्पोर्टस आफिसर के पद पर कार्यरत है। वर्ष 2009 में माध्यमिक शिक्षा चयन बाेर्ड का पर्चा लीक कराने के मामले में थाना सिविल लाईन्स से वह अपने सहयोगी समीर सिंह, अजय सिंह आदि के साथ जेल चला गया था। जेल से छूटने के बाद पुनः एमएनएनआईटी ज्वाइन कर लिया एंव अपने मित्र मृत्युन्जय सिंह के माध्यम से माे0 शमीम सिद्दीकी तथाकथित डिप्टी रजिस्ट्रार के सम्पर्क में आया और इनके धन्धे में शामिल हो गया।
उन्होंने बताया कि राघवेन्द्र अभी तक लगभग 700 अभ्यर्थियाें से अवैध वसूली कर शमीम को दस करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दे चुका है। यह बदमाश अयोध्या कैंट में दर्ज मामले में गिरफ्तार हाेकर जेल चला गया था, जिसमें वह जमानत पर बाहर है। मुकदमा हाे जाने और जेल जाने के कारण उसे एमएनएनआईटी द्वारा निलम्बित कर दिया गया था।गिरफ्तार ठगों को शिवकुटी थाने में दाखिल करा दिया गया है। आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस करेगी।
त्यागी
वार्ता
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