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सरकारों की उपेक्षाओं के कारण सूख रही चंबल की लाइफ लाइन क्वारी नदी

इटावा, 03 मई(वार्ता)मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार की उपेक्षाओं के कारण चंबल की लाइफ लाइन कहे जाने वाली क्वारी नदी का अस्तित्व खतरे में है।
पानी की कमी के कारण करीब 24 से अधिक गांवों की ढाई हजार बीघा से अधिक खेती चौपट होने के कगार पर है। पंचनदा में समाहित होने वाली क्वारी नदी मध्यप्रदेश जिले के शिवपुरी बैराग तहसील की पहाड़ियों से निकली है । नदी मध्य प्रदेश के कई जिलों से बहते हुए उत्तर प्रदेश में आती है।
चंबल इलाके के किसानों का मानता है कि क्वारी नदी सूख गई है। चंबल की लाइफ लाइन कही जाने वाली क्वारी नदी के सूखने से पशु-पक्षी तड़प रहे हैं।
ग्राम पंचायत सिंडौस के पूर्व प्रधान सज्जन सिंह राजावत ने कहा दोनों प्रदेशों की सरकारों की उपक्षाओं के कारण क्वारी नदी सूखने के कगार पर है। हकीकत में नदी के पानी पर मध्य प्रदेश के दबंग किसानों ने कब्जा कर रखा है। नदी में इतना पानी नहीं होता है कि धार आगे बह सके । मध्यप्रदेश में नदी की धारा को कई जगहों पर रोक करके किसान सिंचाई में इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि मध्यप्रदेश के मुरैना के बुधार पुल समेत कई अन्य स्थानों पर क्वारी नदी की धारा को रोका गया है। इसी तरह पोरसा से लेकर परा तक लोगों ने जगह जगह स्टेप डैम बना रखे हैं । बोरियों से बंधा लगाकर पानी रुका हुआ है । पंपिंग सेट लगाकर पानी का दोहन हो रहा है । नतीजा यह है कि फूफ के कनकूडाघाट तक ही क्वारी नदी की धारा बह पाती है । इसके बाद आगे नहीं बढ़ती । गर्मी के चलते बचाखुचा पानी भी उड़ जाता है ।
श्री सिंह ने बताया कि लगभग 18 वर्ष पूर्व यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित था। इस कारण किसान खेती नहीं कर पाते थे । डकैतों का खौफ था तो कोई भी पानी रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था । अब मुरैना से लेकर भिंड सीमा तक कई जगह नदी का पानी रोक कर सिंचाई की जा रही है । जिस कारण पानी नदी के निचले भाग तक नहीं आ पा रहा है । इलाकाई लोगों ने क्वारी नदी की समस्या भरथना से भाजपा विधायक श्रीमती सावित्री कठेरिया के समक्ष रखी थी । किसानों की व्यथा सुनने के बाद उन्होंने क्वारी नदी पर तीन डैम बनाने का प्रस्ताव योगी सरकार के पास भेजा । जिन्हें मंजूरी मिल गई है और काम भी शुरू करा दिया गया है ।
सं भंडारी
जारी वार्ता
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