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लोकरूचि नदी अस्तित्व दो अन्तिम इटावा

चंबल सेंचुरी के मुख्य वनरक्षक आनंद कुमार का कहना है कि क्वारी नदी के सूखने से वन्य जीव पानी की तलाश में जंगल के निकटवर्ती गांव में घुसपैठ कर रहे हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता । जहां तक पानी की कमी से वन्यजीवो की मौत का प्रश्न है तो चंबल नदी में पर्याप्त पानी है। चंबल के बिठौली थाना के तहत कालेश्वर मंदिर पर पांच नदियों का संगम है। क्वारी नदी उन पांच नदियों में शुमार है। इससे पचनदा की पहचान बनी। अब इस नदी के सूख जाने से यह पहचान सिर्फ कागजों में सिमट गई है । आलम यह है कि नदी का पानी सूखने से भिंड जिले की सीमा के पास दो दर्जन से अधिक गांव की ढाई हजार बीधा से अधिकारी कछारी की खेती चौपट पड़ी है ।
पशुपालन कारोबार भी तबाई के कगार पर है । डेढ़ दशक पहले तक किसान खेती के साथ गाय भैंस बकरी या पाल लेते थे । गर्मी के मौसम में फसल कट जाने पर नदी के किनारे पशुओं को चराने निकल पड़ते थे । नदी के किनारे पशुओं को हरा चारा और पीने का पानी में रहता था अब पानी की कमी से पशु मौत के मुंह में समा रहे हैं । एक समय क्वारी नदी में 12 महीने पानी रहता था अब गर्मी में नदी सूख जाती है। नदी के किनारे बसे गांव सोने का पुरा, उखरैला, चंद्रहंसपुरा, भोया, पसिया, रामकिला, विंडवाखुर्द, हनुमंतपुरा, सिंडौस, खौड़न, कुंअरपुर कुर्छा, अजीत की गढिया, जाहरपुरा, , पहलन, बिडौरी, रीतौर की मड़ैया, सहित लगभग एक सैकडा से अधिक गांवो के पशु भी इसी नदी में पानी पीते रहे हैं।
सिंडौस के निवासी किशन सिंह राजावत, रामबाबू राजावत, अजीत की गड़िया के कैलाश मिश्रा,पसिया के राम महेश दुबे,हनुमंतपुरा निवासी ब्रज किशोर दुबे,डिडौली के अपरबल सिंह परिहार ,भदौरिया के पुरा के बृजेंद्र कुमार का कहना था कि वह नदी के किनारे होने वाली जायद की फसलों से वंचित है । मवेशी भी तड़प रहे हैं । वन्य जीव पानी की तलाश में गांव का रुख कर रहे हैं । धीरे-धीरे चंबल इलाके का भूजल स्तर भी कम हो रहा है । चंबल सेंचुरी का काफी हिस्सा क्वारी नदी के पास है । लिहाजा वन्यजीवो को पानी मिलता था । अब नदी के सूख ने से पशु पक्षी तड़प रहे है ।
सं भंडारी
वार्ता
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