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दुर्गापूजा के अवसर पर झांसी में रही विसर्जन की धूम

झांसी 08 अक्टूबर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के झांसी में नवरात्र के नौ दिनों तक विभिन्न स्थानों पर पंडालों में मां दुर्गा के नौ रूपों की श्रद्धाभाव से पूजा अर्चना के बाद मंगलवार को दुर्गापूजा पर विसर्जन से पहले दर्शनोंं के लिए शहर के मुख्य भाग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
शहर भर में इस बार विभिन्न पंडालों में मां की 649 प्रतिमाओं की स्थापना की गयी थी जबकि पूरे जनपद में 1080 प्रतिमाओं को स्थापित किया गया था। शहर में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की प्रतिमाओं में कोतवाली थानाक्षेत्र अंतर्गत खटिकयाना में मां काली के भव्य रूप की स्थापना की गयी। नौ दिनों तक पूजा अर्चना के बाद आज बकरों की बलि दी गयी इसके बाद बड़ी संख्या में लोग कंधों पर मां की प्रतिमा को लेकर आगे बढे। यूं तो सभी प्रतिमाओं काे विसर्जन के लिए स्थापना स्थल से उठाया जाता है लेकिन खटकियाने की महाकाली को जब एक बार स्थापना स्थल से उठाया जाता है तो वह विसर्जन स्थल तक कहीं नहीं रूकती और भक्तगण अपने कंधों पर माई को तेजी से लेकर विसर्जन स्थल लक्ष्मीताल तक पहुंचाते हैं।
इसके लिए रास्ते में यदि अन्य प्रतिमाओं को ले जाया जा रहा होता है तो उन्हें यहां वहां रोक कर सबसे पहले महाकाली को रास्ता दिया जाता है। महाकाली के दर्शनों के लिए खटकियाने से लेकर लक्ष्मीताल के बीच रास्ते के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में पूरे यात्रा मार्ग पर लोगों की भीड़ को संभालने में पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल जाते हैं। पूरे रास्ते में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये जाते हैं । चप्पे चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात होते हैं और महाकाली की यात्रा को सुगम बनाने का पूरा इंतजाम किया जाता है।
महाकाली के गुजरने के बाद मां के विभिन्न रूपों की प्रतिमाओं को एक एक कर विसर्जनस्थल की ओर रवाना किया जाता है। पूरा इलाका इस दौरान मां के उद्घोष से गुंजायमान रहता है।
इस कार्यक्रम के शांतिपूर्ण समापन के लिए पुलिस और प्रशासन पहले से ही पूरी तैयारी करता है। जिस मार्ग से प्रतिमाएं विसर्जन स्थल तक जाती हैं वह कहीं कहीं काफी संकरा होने के कारण व्यवस्था बनाये रखना बेहद मुश्किल काम होता है । इसके लिए प्रशासन पूरा होमवर्क करता है रास्तों के गडढे आदि को पहले ही भर दिया जाता है । मार्ग में आने वाले खंभों, बिजली के लटकते तारों और फैले पेड़ों की रास्ते की ओर झुक रही डालों को काटकर पूरी तैयारी पहले से ही की जाती है ताकि विसर्जन के दिन बड़ी बड़ी प्रतिमाओ को ले जाने वाले भक्तों और दर्शनों के उमड़ी भीड के बीच व्यव्स्था बनायी रखी जा सके।
कुछ प्रतिमाओ को भक्त कंधों पर लेकर और कुछ को वाहनों पर रखकर विसर्जन स्थल की ओर अग्रसर होते हैं। एक के बाद प्रतिमाओं के लगातार निकलने का सिलसिला सुबह से ही शुरू होकर देर रात तक चलता है और पुलिस प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया के शांतिपूर्ण तरीके से समापन के लिए पूरी ताकत झोंके रहता है।
सोनिया
वार्ता
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