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महात्मा गांधी का जीवन-दर्शन वर्तमान समय में प्रासंगिक: प्रो0 रामुलू

वाराणसी, 01 अक्टूबर (वार्ता) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन को वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक बताते हुए उस्मानिया यूनिवर्सिटी के प्रो0 एम रामुलू ने गुरुवार को कहा कि वह अत्यंत ‘विराट’ और ‘प्रभावशाली’ है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में राष्ट्रपिता की 150 वीं जयंती के अवसर पर यहां तीन दिवसीय “गांधी पर्व” के द्वितीय दिन “गांधी दर्शन में व्यक्तिगत मूल्य और नेतृत्व” विषयक ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना उस्मानिया यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर रामुलू ने मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन दर्शन अत्यंत विराट और प्रभावशाली है।
उन्होंने कहा कि गांधी ने वही कहा जिसे उन्होंने अपने जीवन में खुद करके देखा और उसे समाज के लिए सही समझा। राष्ट्रपिता की आत्मकथा पर विस्तृत चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मकथा पढ़ते हुए अनेक ऐसे दृष्टांत मिलते हैं जिससे यह प्रतीत होता है कि गांधी एक अत्यंत ही कुशल नेतृत्वकर्ता थे। उनके विचार वर्तमान समय में अधिक प्रासंगिक है।
संगोष्ठी में बीएचयू राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ बाला लखेंद्र ने कहा गांधी अपने जीवन संघर्ष में जो कुछ भी प्रत्यक्ष रूप से महसूस कर पाए उसे ही उन्होंने आम लोगों को बताया था। निस्संदेह गांधी के जीवन दर्शन से ही हम समाज में समरसता,भाईचारा, प्रेम और शांति का संदेश प्रसारित कर सकते हैं।
मुख्य अतिथि के तौर पर गांधी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष डॉक्टर गुना राजेंद्र रेड्डी ने कहा कि आज से 100 वर्ष पहले गांधी ने जिस समाज की परिकल्पना की थी आज उसी आत्मनिर्भर गांव और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन किये जा रहे हैं। गांधी के सपनों का भारत आत्मनिर्भर और स्वाबलंबी गांव का भारत था जिसके लिए वर्तमान सरकार प्रयत्नशील है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ0 अशोक श्रोती ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म जयंती वर्ष 1969 में प्रारंभ राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने राष्ट्र निर्माण के अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक निर्माण के द्वारा समाज में एकता और भाईचारे का जो संदेश प्रतिपादित किया है वह प्रशंसनीय है।
संगोष्ठी में डॉ0 पी बाला भास्कर, डॉ0 श्याम बाबू पटेल,डॉ0 गीता लक्ष्मी पटनायक, डॉ0 एस राधिका, डॉ0 चिन्मय राय,डॉ शांति,डॉ संतोष गांधी, डॉ0 विद्या ज्योति, डॉ0 के भावना, आर्यमन पाठक सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
बीरेंद्र त्यागी
वार्ता
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