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उत्तर प्रदेश-आनंदीबेन औषधि दो अंतिम लखनऊ

राज्यपाल ने कहा कि हमारे चिकित्सा संस्थान कौशल तकनीक संवर्द्धन, स्थानीय संसाधनों, श्रम शक्ति को सशक्त करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अभियान में सहयोग करें ताकि हमारा समाज और राष्ट्र स्वस्थ, सतर्क और सशक्त बना रहे। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में शिक्षण संस्थाओं को अवसर मिला है कि समाज की वर्तमान चुनौतियों के समाधान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार शिक्षण व्यवस्था में परिवर्तन कर ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करें, जिसमें युवाओं को ज्यादा से ज्यादा जोड़ा जा सके।
श्रीमती पटेल ने कहा कि सरकार की जन औषधि योजना में जनसाधारण को सस्ती औषधि उपलब्ध कराने में फार्मेसी संस्थानों का प्रमुख योगदान है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों में फार्मेसिस्ट की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा स्वस्थ इण्डिया योजना के अन्तर्गत मील का पत्थर साबित होगी। शहरी स्वास्थ्य योजना के तहत शहर की मलिन बस्तियों के लिए स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने मे फार्मेसिस्टों का सहयोग लिया जाता है। चिकित्सा के क्षेत्र में फार्मेसिस्टों की जिस प्रकार से मांग बढ़ रही है, उससे आने वाले समय में फार्मेसिस्ट ‘हेल्थ केयर सिस्टम’ का एक महत्वपूर्ण अंग होंगे।
उन्होंने ने कहा कि सांइस और टेक्नालाॅजी विकास के लिये बहुत आवश्यक है। देश का सतत विकास इसी पर टिका हुआ है। गरीबी के खिलाफ लड़ाई जीतने और एक समान प्रगति के लिये वैज्ञानिक समुदाय के कार्यों से लाभ उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज का समय नई-नई तकनीकियों का है, ऐसे में फार्मेसिस्टों के कार्य क्षेत्र भी बढ़े हैं। इंटरनेट के माध्यम से फार्मेसी कंसलटेंट का कार्य हो रहा है, जो मरीजों को दवाइयों के इस्तेमाल करने के तरीके और उनके इस्तेमाल के नुकसान के बारे में जानकारी देते हैं।
इस अवसर पर डा0 भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के कुलपति डा0 अशोक मित्तल, धर्म समाज सोसाइटी के अध्यक्ष श्री महेश नन्दन अग्रवाल, सचिव श्री संजीव अग्रवाल, धर्म समाज काॅलेज आफ फार्मेसी के प्राचार्य डा0 लाल रत्नाकर सिंह एवं धर्म समाज महाविद्यालय के प्राचार्य डा0 हेम प्रकाश आनलाइन जुड़े हुए थे।
त्यागी
वार्ता
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