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उत्तर प्रदेश योगी बाढ़ दो लखनऊ

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग, केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ प्रदेश के सिंचाई एवं जल संसाधन, गृह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सिंचाई एवं जल संसाधन, खाद्य एवं रसद, राजस्व एवं राहत, पशुपालन, कृषि, राज्य आपदा प्रबन्धन, रिमोट सेन्सिंग प्राधिकरण के बीच बेहतर तालमेल हो। केंद्रीय एजेंसियों/विभागों से सतत संवाद-संपर्क बनाए रखें। यहां से प्राप्त आंकलन/अनुमान रिपोर्ट समय से फील्ड में तैनात अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाए। भारत सरकार की एजेंसियों की मदद से आकाशीय बिजली के सटीक पूर्वानुमान की बेहतर प्रणाली के विकास के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होने कहा कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी तटबंधों की सतत निगरानी की जाए। राज्य स्तर और जिला स्तर पर बाढ़ राहत कंट्रोल रूप 24×7 एक्टिव मोड में रहें। बाढ़ के प्रति अतिसंवेदनशील तटबन्धों जैसे गोरखपुर में राप्ती नदी पर निर्मित बढ़या-कोठा तटबंध, गाहासाड़-कोलिया एवं बोक्टा-बरवार तटबंध, जनपद बलिया में गंगा नदी पर दूबे छपरा-टेंगरही तटबंध एवं सरयू नदी पर निर्मित तुर्तीपार-श्रीनगर तटबंध, कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी पर एपी तटबंध एवं अमवाखास तटबंध, देवरिया ने गोर्रा नदी पर पाण्डेयमाझा-जोगिया तटबंध, गोण्डा में सरयू नदी पर निर्मित सकरौर-भिखारीपुर तटबंध एवं एल्गिन ब्रिज-चरसरी तटबंध, जनपद बहराइच में सरयू नदी पर निर्मित बेल्हा-बेहरौली तटबंध एवं रेवली आदमपुर तटबंध, जनपद बस्ती में सरयू नदी पर निर्मित कटरिया- चांदपुर तटबंध एवं कलवारी - रामपुर तटबंध, बाराबंकी में सरयू नदी पर निर्मित अलीनगर-रानीमऊ तटबंध, , बलरामपुर में राप्ती नदी पर निर्मित बलरामपुर- भड़रिया एवं राजघाट तटबंध, बस्ती में कटरिया-चांदपुर तटबंध, चांदपुर-गोरा तटबंध, कलवारी-रामपुर तटबंध, विक्रमजोत-घुसवा तटबंध एवं काशीपुर-दुबौलिया तटबंध, बाराबंकी में सरयू नदी पर अलीनगर-रानीमऊ तटबंध और रामपुर में कोसी नदी पर लालपुर रुहेला तटबंध पर मरम्मत के समस्त कार्य पूर्ण करा लिए जाएं।
उन्होने कहा “ हमें बाढ़ के साथ-साथ जलभराव के लिए भी ठोस प्रयास करना होगा। जिलाधिकारी स्वयं रुचि लेकर जलभराव से बचाव के लिए व्यवस्था की देखरेख करें। प्रत्येक दशा में 30 जून तक नालों आदि की सफाई का कार्य पूर्ण करा ली जाए। उन्होने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि अपराधी/माफिया प्रवृत्ति/खराब छवि के लोग सिंचाई विभाग की परियोजनाओं की ठेकेदारी में कतई न प्रवेश करने पाएं। ठेकेदार तय करते समय सूक्ष्मता से इसकी पड़ताल कर इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता हुआ पाया गया और उसमें किसी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी की संलिप्तता मिली तो उस के खिलाफ भी मिलीभगत का दोषी मानकर कार्यवाही की जाएगी।”
प्रदीप
जारी वार्ता
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