Saturday, Sep 22 2018 | Time 06:56 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • इजरायल सेना की गोलीबारी में फिलीस्तीनी की मौत
  • वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका करेगा कार्रवाई : पोम्पेओ
  • न्यूयॉर्क में तीन नवजात बच्चों,दो लोगों पर चाकू से हमला
  • राफेल सौदा प्रकरण, फ्रांस की कंपनियां भारतीय सहयोगी चुनने को लेकर स्वतंत्र: फ्रांस सरकार
  • राफेल सौदा प्रकरण, फ्रांस की कंपनियां भारतीय सहयोगी चुनने को लेकर स्वतंत्र: फ्रांस सरकार
  • मलिक के कमाल से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को हराया
  • राष्ट्रपति ने नौका हादसे की जांच का दिया आदेश
  • नन से दुष्कर्म का आरोपी बिशप मुलक्कल गिरफ्तार
दुनिया Share

ईरान पर प्रतिबंधों से ओपेक को खतरा

तेहरान 07 जुलाई (वार्ता) ईरान के पेट्रोलियम मंत्री के सलाहकार मोय्यद होसैनी सद्र ने अमेरिकी प्रतिबंधों को तेल उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) के लिए गंभीर खतरा बताया है।
श्री सद्र ने शनिवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों से ओपेक के खत्म होने की आशंका बढ़ जायेगी।
श्री सद्र ने इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी से कहा, “अमेरिका का यह मानना है कि वह तेल की कमी को सऊदी अरब के जरिए पूरी कर सकता है लेकिन उसे यह समझ लेना चाहिए कि वह अपने इस कदम से ओपेक की योजना को नुकसान पहुंचा रहा है, चूंकि ईरान दुनिया के कुल तेल उत्पादन का पांच प्रतिशत उत्पादन करता है।”
श्री सद्र ने कहा कि यदि ईरान पर प्रतिबंध जारी रहे तो ओपेक जैसा संगठन समाप्त हो जायेगा।
अमेरिका के परमाणु समझौते से अलग होने के बाद शुक्रवार को पहली बार ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस के मंत्रियों ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में ईरान के मंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में अमेरिकी प्रतिबंधों के ऐवज में ईरान को आर्थिक पैकेज देने पर विचार किया गया।
अमेरिका ने विभिन्न देशों को चार नवंबर तक ओपेक (तेल उत्पादक देशों के संगठन) के सदस्य ईरान से तेल आयात समाप्त करने के लिए कहा है। ऐसा नहीं करने वालों को अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।
श्री सद्र ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान के तेल की बिक्री में गिरावट आ सकती है लेकिन विभिन्न कंपनियों द्वारा तेल की खरीद से इस नुकसान की पूर्ति की जा सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई में इस ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ईरान ने अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
रवि.संजय
वार्ता
image