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श्री मोदी ने कहा कि विश्व को अफ्रीका के पूर्वी तट और पूर्वी हिंद महासागर में प्रतिस्पर्धा की नहीं बल्कि सहयोग की जरूरत है, इसलिए हिंद महासागर की सुरक्षा को लेकर भारत का दृष्टिकोण सहयोगात्मक और समावेशी है तथा यह क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा और प्रगति में समाहित है।
प्रधानमंत्री ने अफ्रीका के विकास, बेहतर जन सेवाएं प्रदान करने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, डिजिटल साक्षरता के प्रसार, वित्तीय समावेशन और हाशिये पर मौजूद लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए डिजिटल क्रांति में भारत के अनुभव का लाभ उठाने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका की कृषि के विकास में मदद करेगा। दुनिया की कुल कृषि याेग्य भूमि का 60 फीसदी अफ्रीका में है लेकिन वैश्विक उत्पादन का केवल 10 फीसदी हिस्सा यहां उपजता है।
श्री मोदी ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान, जैव विविधता के संरक्षण के लिए काम और ऊर्जा के स्वच्छ एवं प्रभावी स्रोतों को अपनाने में अफ्रीका की मदद करेगा। उन्होंने कहा, “ हम आतंकवाद और चरमपंथ से लड़ाई में सहयोग और आपसी क्षमताओं को मजबूत बनाएंगे।
वैश्विक संस्थाओं के लोकतांत्रीकरण का आह्वान करते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत की इन संगठनों में सुधार की चाह तब तक अधूरी रहेगी जब तक कि अफ्रीका में उसे समान जगह नहीं मिलती। यह भारत की विदेश नीति का एक मुख्य उद्देश्य है।
यामिनी.श्रवण
वार्ता
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