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ब्रिक्स ने जतायी संरक्षणवाद के खिलाफ खड़े होने की प्रतिबद्धता

जोहान्सबर्ग 26 जुलाई (वार्ता) उभरती हुई पाँच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं - भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका - के संगठन ब्रिक्स ने आज वैश्विक व्यापार में आत्मवाद और संरक्षणवाद के खिलाफ खड़े होने की प्रतिबद्धता जतायी तथा विश्व व्यापार संगठन की कल्पना के अनुरूप एक मुक्त एवं समावेशी बहुलवादी व्यापार तंत्र के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
ब्रिक्स देशों की यहाँ हो रही शिखर बैठक के अंत में जारी घोषणा पत्र में इन देशों के नेताओं ने कहा “हम समझते हैं कि बहुलवादी व्यापार तंत्र के सामने आज अभूतपूर्व चुनौतियाँ हैं। हम मुक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्त्व को रेखांकित करते हैं।”
इससे पहले बैठक में भारत का पक्ष रखते हुये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुलवाद, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था के लिए देश की प्रतिबद्धता जतायी।
चीन और रूस ने अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के महत्त्व को स्वीकार करते हुये संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की उनकी आकांक्षाओं में सहयोग का आश्वासन दिया। संयुक्त घोषणा पत्र में सुरक्षा परिषद् समेत संयुक्त राष्ट्र में बड़े पैमाने पर सुधार के प्रति प्रतिबद्धता जतायी गयी है ताकि यह ज्यादा प्रभावी हो सके और इसमें विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़े।
ब्रिक्स देशों ने अपने बहुस्तरीय मिशनों के जरिये आपसी बातचीत से परस्पर हित के क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की बात कही।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामपोसा ने अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के संदर्भ में कहा “हम आत्मवाद के ऐसे बढ़ते उपायों - विशेष कर विकासशील देशों के खिलाफ - को लेकर चिंतित हैं जो विश्व व्यापार संगठन के नियमों के विरुद्ध हैं और इनके असर को लेकर हमें चिंता हो रही है।”
चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग ने बुधवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुये कहा कि हम ऐसे मोड़ पर पहुँच चुके हैं जहाँ दुनिया को संघर्ष तथा सहयोग में से एक का चयन करना है। व्यापार युद्धों को खारिज किया जाना चाहिये। इन्हें अपनाने वाले अपना ही नुकसान करेंगे। ब्रिक्स के रूप में हमें आत्मवाद और संरक्षणवाद को खारिज करने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ होना चाहिये।
अजीत उनियाल
वार्ता
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