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युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है अफगान मस्जिद हमला:

संयुक्त राष्ट्र, 04 अगस्त (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र सहयोग मिशन (यूएनएएमए) ने अफगानिस्तान की एक मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के दौरान आत्मघाती विस्फोट की निंदा की है और कहा है कि यह युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
गौरतलब है कि काबुल के दक्षिण में करीब 50 मील दूर गार्देज शहर की शिया मस्जिद में शुक्रवार को दो आत्मघाती हमलावरों ने खुद को विस्फोट में उड़ा लिया, जिसमें 48 लोगों की मौत हो गयी और 70 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के अफगानिस्तान के लिए विशेष प्रतिनिधि के तौर पर भी कार्य संभाल रहे यूएनएएमए प्रमुख तदामिचि यामामोतो ने कहा,“ नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए इस हमले का कोई भी संभव तार्किक आधार नहीं है।” उन्होंने कहा, “इस हमले को अंजाम देने के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।”
समाचार रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान ने इस हमले से कोई संबंध होने से इनकार किया है और तात्कालिक तौर पर किसी ने भी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। रिपोर्टों में कहा गया है कि दाएश के भी नाम से जाने जाने वाले आतंकवादी संगठन आईएसआईएल से जुड़े आतंकवादी पूर्व में शियाआें के खिलाफ बिल्कुल ऐसे ही हमले करता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी कानून भी इबादतगाहों सहित नागरिकों और नागरिक की संपत्तियों के खिलाफ जानबूझकर किए गए हमले के खिलाफ है। यह युद्ध में शामिल पक्षों को इस नियम में बांधता है कि वे धार्मिक नेताओं को बिना किसी डर-भय के उनके समुदाय के लोगों की सेवा करने के लिए अनुमति दें।
उन्होंने जोर देकर कहा, “ प्रार्थना स्थल और धार्मिक सभाओं पर निशाना साधकर किए गए ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन हैं। यह युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।”
यूएनएएमए ने मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति सहानुभूति जताई है और घायलों के शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की है। हाल का आतंकवादी हमला पूर्वी शहर जलालाबाद में बुधवार को एक आत्मघाती हमले और एक सरकारी इमारत को बंधक बनाने की घटना के बाद हुआ है।
यूएनएएमए के मध्य जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, इस साल के पहले छह महीने में 1,692 नागरिक मारे गए और 3,430 अन्य लोग घायल हो चुके हैं। किसी भी साल के पहले छह महीने में यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह तब है जब मध्य जुलाई में सरकार और तालिबानी चरमपंथियों के बीच कई दिनों तक अप्रत्याशित संघर्ष-विराम हुआ था।
सुरक्षा परिषद ने भी सप्ताह भर में हुए ‘क्रूरतापूर्ण और कायरतापूर्ण आतंकवादी हमलों की कड़े शब्दों में’ निंदा करते हुए बयान जारी किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों और अफगान सरकार के प्रति गहरी सहानुभूति जताई है और घायलाें के शीघ्र ही पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की है।
परिषद ने दोबारा जोर देकर कहा, “आतंकवाद के सभी रूप और इसके तरीके अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।” इसने इस बात पर जोर दिया,“ आतंकवाद के ऐसे निंदनीय काम करने वाले अपराधियों, संगठनों, पैसा मुहैया कराने वाले और प्रायोजकों को जिम्मेदार ठहराया जाए और उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाए। इसने सभी राज्यों से ‘इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानून की बाध्यताओं और सुरक्षा परिषद के इससे जुड़े प्रस्तावों के अनुरूप अफगानिस्तान सरकार और इससे जुड़ी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने’ का अाग्रह किया।
परिषद ने जोर दिया,“ जहां या जब कभी भी किसी व्यक्ति ने किसी भी उद्देश्य से आतंकवादी कार्रवाई किया हो, आतंकवाद की सभी कार्रवाई आपराधिक है और इसे सही नहीं ठहराया जा सकता है।”
उन्होंने इस बात पर दोबारा जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों और दूसरी बाध्यताओं के तहत सभी सरकारों को सभी संसाधनों के साथ अंतराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा आतंकवादी गतिविधियों से लड़ना चाहिए।
अमित.श्रवण
वार्ता
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