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श्री रूहानी ने कहा यूरोपीय सहयोगी राष्ट्र श्री ट्रंप को 2015 के परमाणु समझौते से पीछे हटने से रोकने में असफल रहे जिसके अंतर्गत ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रमों को रोकने पर सहमत हुआ था। अमेरिका को अपने इस कदम के लिए पछताना पड़ेगा। अमेरिका के इस कदम को अन्य देशों ने खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा, “अमेरिका को ईरान पर प्रतिबंध लगाने के लिए पछताना पड़ेगा। अमेरिका पहले ही विश्व में अलग-थलग पड़ चुका है। अमेरिका ईरान के बच्चों, मरीजों और पूरे राष्ट्र प्रतिबंध थोप रहा है।”
श्री रूहानी ने ईरान के लोगों से अपील की कि एकजुट होकर मुश्किल हालतों का सामना करें। उन्होंने कहा, “हम पर प्रतिबंधों का दबाव है लेकिन हम एकजुटता के साथ इससे पार पा सकते हैं।”
प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। ईरान की मुद्रा रियाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिर रही है और सरकार प्रदर्शनों का दमन कर रही है।
ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य कमांडरों ने श्री ट्रंप के बातचीत के प्रस्ताव को मूल्यहीन करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि श्री ट्रंप की कथनी और करनी में विरोधाभास है।
दिनेश
रायटर
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