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वहीं, 18 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व हिंदी सम्मेलन से पहले पूरे मॉरिशस में हिंदी की धूम साफ देखी जा रही है। पूरे शहर में इस सम्मेलन के प्रचार के लिए हिंदी में होर्डिंग लगाये गये हैं। साथ ही स्थानीय टेलीविजन एवं रेडिया पर सम्मेलन की चर्चा हो रही है। भारत और मॉरिशस सरकार के संयुक्त प्रयास से 18 से 20 अगस्त तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन को अब तक का हिंदी का सबसे बड़ा सम्मेलन माना जा रहा है।
इस सम्मेलन की खास बात है कि इसमें शामिल होने के लिए 1462 लोगों ने खुद पंजीयन कराया है, जो रिकॉर्ड है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए 377 लोगों का सरकारी प्रतिनिधिमंडल भी यहां आया है, जिनमें 47 विदेशी है। वहीं, भारत के 28 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल भी यहां पहुंच रहे हैं। मॉरिशस में जिस स्थान पर इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, उसका नामकरण महाकाव्य रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर किया गया है।
मॉरिशस सरकार के अधिकारियों के अनुसार, सम्मेलन के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी के निधन के कारण कार्यक्रम में कुछ बदलाव भी किये गये हैं।
गंगा आरती के दौरान केंद्रीय मंत्री वी. के. सिंह, एम. जे. अकबर के अलावा पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा, जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के प्रधान महासचिव के. सी. त्यागी के साथ ही मॉरीशस सरकार के भी कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उपाध्याय शिवा
वार्ता
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