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मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत बहुसंस्कृति में विश्वास रखता है। भारतीय भाषाएं विशेष रूप से हिन्दी भारत और मॉरिशस की संस्कृति एवं मूल्यों से जुड़ा हुआ है। हिन्दी कई संस्कृति और कई भाषाओं से मिलती-जुलती है। हिन्दी एक सांस्कृतिक धरोहर है और यह एक समृद्ध इतिहास वाली भाषा ही नहीं बल्कि इसका भविष्य भी उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि यदि हमें हिन्दी के भविष्य को लेकर तनिक भी संदेह है तो दुनिया में चारो ओर देखना चाहिए। इस सभागार में दुनिया के अलग-अलग हिस्से से आये हिन्दी के विद्वानों का उत्साह, उमंग और आस्था इसके उज्ज्वल भविष्य का प्रमाण है।
श्री जगन्नाथ ने कहा कि हिन्दी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना स्थान बनाया है। आज दुनिया के 40 देशों के 600 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें बेहद खुशी हुई जब भारतीय फिल्मकार कुणाल कोहली ने दो दिन पहले रामायण पर फिल्म बनाने और उसका पूरा फिल्मांकन मॉरिशस में करने की घोषणा की। यह दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का एक और प्रमाण है। इसे कहते हैं ‘खून का रिश्ता।’ दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध कायम रहे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मॉरिशस में पहला हिन्दी समाचार पत्र हिन्दुस्तानी वर्ष 1907 में प्रकाशित हुआ, जो यहां लाये गये मजदूरों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ एक आवाज बना। मॉरिशस में हिन्दी को हमेशा से उचित स्थान दिलाने का प्रयास होता रहा है। वर्ष 1994 से यहां हिन्दी माध्यमिक और विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मॉरिशस सरकार ने हिन्दी संगठन की स्थापना की है, जो भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के साथ मिलकर हिन्दी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
शिवा उपाध्याय सूरज
जारी (वार्ता)
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