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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर देश-विदेश में हिंदी से जुड़े संस्थान और पुरस्कार शुरू करने की अनुशंसा की गयी। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले फिल्मकारों को प्रोत्साहन देने पर बल दिया गया ताकि फिल्मों के माध्यम से असल भाषा सामने आ सके। साथ ही बाल साहित्य को बढ़ावा देने के लिए बाल साहित्य अकादमी बनाने और पत्रिकाओं एवं मीडिया में अधिक से अधिक बाल साहित्य को शामिल करने की अनुशंसा की गई।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि और मॉरीशस के कार्यवाहक राष्ट्रपति परमशिवम पिल्लै वायापुरी ने हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की सातवीं आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिलाने की मांग को तर्कसंगत बताया और कहा कि सम्मलेन ने इस उद्देश्य की प्राप्ति की इच्छा और प्रतिबद्धता को काफी मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि मॉरीशस के राष्ट्रीय पक्षी ‘डोडो’ के समान हिन्दी लुप्त नहीं होगी और संयुक्त राष्ट्र में अपना स्थान पाकर रहेगी। इसके लिए सभी को एकसाथ खड़ा होना होगा। मॉरीशस इस उद्देश्य में भारत के सहयोगी के तौर पर सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़ा होगा।
श्री वायापुरी ने कहा कि फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संरक्षण विषय पर कल आयोजित सत्र काफी सकारात्मक रहा। उन्होंने कहा कि उनका मत है कि हिन्दी विश्व में केवल भाषा का ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों का भी प्रचार करती है। सत्र के दौरान विरोध करने वालों के मत से भी वह कुछ हद तक सहमत हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी फिल्मों में ऐसे दृश्य दिखाये जाते हैं, जो भारतीय मूल्यों से मेल नहीं खाते। इनमें अनावश्यक हिंसा होती है। इसे तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।
कार्यवाहक राष्ट्रपति ने कहा कि फिल्मों में मानवीय व्यवहार पर ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही आलोचनाओं पर ध्यान देते हुए अनावश्यक हिंसा और भारतीय मूल्यों से मेल नहीं खाने वाली स्थिति को कम करना या हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा बोलना ही पर्याप्त नहीं है। लाखों लोग जो इस भाषा को बोलते नहीं हैं लेकिन वे इसका संदेश ग्रहण करने को इच्छुक हैं, उनकी भावनाओं का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।
शिवा उपाध्याय सतीश
जारी वार्ता
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