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सेना के साथ हमारे संबंध बुरे नहीं: सू की

सिंगापुर, 21 अगस्त (रायटर) म्यांमार सरकार प्रमुख और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की ने सेना के साथ अपनी सरकार के संबंधों के बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सेना के साथ उनके संबंध बुरे नहीं हैं और उनकी सरकार में शामिल सेना के कईं अधिकारी काफी अच्छे हैं।
म्यांमार के राखिने प्रांत में पिछले वर्ष सेना की कार्रवाई के बाद सुश्री सू की की चुप्पी के बारे में काफी चर्चा थी अौर संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक समुदाय के दूसरे समुदाय पर हमले तथा सफाये की कार्रवाई करार दिया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें दूसरे सैन्य तख्ता पलट की आशंका है तो उन्होंने कहा,“ सेना के साथ हमारे संबंध इतने खराब भी नहीं हैं अौर उम्मीद है कि कुछ नए संवैधानिक प्रावधानों से सेना के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।”
उन्होंने कहा, “ यह मत भूलें कि हमारी सरकार में तीन सदस्य कैबिनेट स्तर के हैं अौर ये तीनों सेना के अधिकारी रहे हैं और ये काफी अच्छे स्वभाव वाले हैं। ”
गाैरतलब है कि 1962 के तख्ता पलट के सेना ने लगभग 50 वर्षों तक म्यांमार में शासन किया था और मानवाधिकारों के बारे में आवाज उठाने के बारे में सैन्य प्रशासन ने सुश्री सू की 15 वर्षों तक घर में नजरबंद रखा था। सेना ने उन्हें 2010 में नजरबंदी से राहत दी थी और 2015 में हुए चुनावों में जोरदार बहुमत हासिल करने के बाद उन्होंने देश की बागडोर संभाली थी।
वर्ष 2008 में संविधान संशोधन के बाद सेना के पास अभी भी काफी ताकत हैं अौर संवैधानिक प्रावधानों के तहत सुश्री सू की के राष्ट्रपति बनने पर प्रतिबंध हैं।
उन्होंने पिछले वर्ष की राखिने प्रांत की हिंसक वारदातों पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा, “ उस हिंसा तथा मानवीय संकट के जिम्मेदार कारणों का खतरा अभी तक टला नहीं है और जब तक सुरक्षा से जुड़े इस मसले का निपटारा नहीं हो जाता है तो विभिन्न समुदायों के बीच हिंसा का खतरा बरकरार रहेगा। यह एक ऐसी धमकी है जिसके काफी खतरनाक परिणाम हो सकते हैं और यह न केवल म्यांमार बल्कि इस क्षेत्र के दूसरे देशों तथा इससे दूर भी अपना असर डालेगा।
उन्हाेंने कहा, “ जैसा कि अधिकतर लोग सोचते हैं कि राखिने प्रांत में केवल मुसलमान ही हैं ताे इस बात में कोई दम नहीं हैं क्योंकि वहां हिन्दू भी हैं अौर दूसरे छोटे समूह भी हैं और मैं आप लोगों से यहीं कहूंगी कि इन छोटे समूहों के बारे में भी ध्यान दें क्योंकि ये काफी तेज गति से कम होते जा रहे हैं। ”
रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यांमार वापसी के बारे में उन्होंने कहा कि अभी इसकी कोई समय सीमा तय करना काफी कठिन है अौर इस बारे में कोई भी प्रकिया शुरू करने की जिम्मेदारी बंगलादेश की भी है।
उन्होंने कहा, “ जो लोग वहां गए थे उन्हें वापस भेजना बंगलादेश की जिम्मेदारी है। हम सीमा पर केवल उनका स्वागत कर सकते हैं अौर मेरा मानना है कि बंगलादेश को भी यह निर्णय लेना हाेगा कि वह इस प्रकिया को कितनी जल्दी पूर्ण कराना चाहता है।”
जितेन्द्र.श्रवण
रायटर
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