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होटल व्यवसायी ने कहा कि मॉरीशस के लोगों को लगता था कि हिंदी सीखने से रोजगार नहीं मिलता और मॉरीशस से बाहर जाने पर उन्हें इस भाषा का कोई लाभ मिलने वाला नहीं है लेकिन अब स्थिति बदली है। उन्होंने कहा कि देश में पर्यटन बढ़ रहा है। यदि मॉरीशस के लोग हिंदी और भोजपुरी ज्यादा बोलने लगेंगे तो भारत के पर्यटक यहां की खूबसूरती के साथ ही यहां की बोलचाल की भाषा के कारण भी आकर्षित होंगे।
मनदॉस रॉयल रोड के किशन राहमा और पैलेस की परमाला हैरी ने भी कहा कि उनकी मां अभी भी घर में हिंदी बोलती हैं लेकिन बाहर वह हिंदी की बजाय फ्रेंच, अंग्रेजी या स्थानीय भाषा क्रियोल में बातचीत करती हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी या भोजपुरी बोलने वालों का शहर के लोग मजाक उड़ाते हैं और उन्हें कम पढ़ा-लिखा या गांव वाला समझते हैं लेकिन मॉरीशस और भारत की सरकार हिंदी और भोजपुरी के प्रसार के लिए प्रयास कर रही है। अब लोग अपने बच्चों को स्कूलों में हिंदी पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन से इस कार्य को और गति मिलेगी।
मॉरीशस में हिंदी भाषा के प्रसार में भारतीय सिनेमा की भूमिका भी उल्लेखनीय है। सम्मेलन में हालांकि ‘फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का संरक्षण’ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता कर रहे हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार एवं सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी की यहां आये स्थानीय प्रतिनिधियों ने खूब खिंचाई की और आरोप लगाया कि भारतीय फिल्में अनावश्यक हिंसा और अश्लीलता दिखाती हैं, बावजूद इसके यहां की अधिकांश टैक्सियों में बॉलीवुड फिल्मों के गाने ही बजते सुनाई देते हैं।
शिवा.श्रवण
जारी (वार्ता)
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