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दुनिया


अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (सीआईजे) चार दिनों तक अमेरिाक के विरुद्ध ईरान की शिकायत की सुनवाई करेगा।
ईरान ने आठ मई को अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकलने के बाद सीआईजे में शिकायत दर्ज की थी। तेहरान ने अपनी याचिका में कहा है कि अमेरिका के परमाणु समझौते से निकलने के बाद प्रतिबंधों को दोबारा लागू करना , ईरान-अमरिकी मैत्री समझौते का उल्लंघन भी है।
ईरान ने दोनों देशों के बीच 19955 में हुए मैत्री सहयोग को हवाला देते हुए सीआईजे में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। इस समझौते में दोनों देशों में सहमति बनी थी कि वे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठायेंगे जिससे दोनों देशों के के सरकारी,अथवा निजी व्यापारिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचे। दोंनों देशों में इस बात पर भी सहमति बनी थी कि यदि दोनों पक्ष कूटनयिक माध्यम से मतभेदों को दूर नहीं कर पायेंगे तो मामले को सीआईजे में ले जाया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने हाल में कहा था कि सीआईजे में अमेरिका के खिलाफ दायर मामले में उसका पक्ष मजबूत है। भले ही अमेरिका ने परमाणु समझौते से निकलने के बाद दोबारा वार्ता की पेशकश की है लेकिन अमेरिकी सरकार द्वारा इससे पहले भी समझौतों का उल्लंघन किया जा चुका है।
श्री जरीफ ने यह भी कहा था कि तेहरान ने वर्ष 1955 के समझौते का पूरा सम्मान किया है जबकि अमेरिका ने कई बार उसका उल्लंघन किया है।
आशा टंडन
रायटर
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