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ईरान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का कर रहा दुरुपयोग : अमेरिका

हेग 28 अगस्त (रायटर) अमेरिका ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (सीआईजे)से ईरान की उस याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया गया जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की ओर से तेहरान के खिलाफ लगाये गये प्रतिबंधों को खत्म करने का आदेश देने का आग्रह किया गया था।
अमेरिका के वकीलों ने सीआईजे के समक्ष कहा कि ईरान का मूल उद्देश्य 2015 के परमाणु समझौते को फिर से बहाल करना है जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवायी कर रहे सीआईजे के न्यायाधीश ने सुनवाई शुरू होने से पहले अमेरिका से न्यायालय के फैसले काे सम्मान करने की बात कही। कई दशकों से एक दूसरे के बीच वैमनस्य की भावना रखने वाले दोनों देशों ने पूर्व में सीआईजे के कई फैसलों का निरादर किया है।
ईरान ने न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाये गये प्रतिबंधों से पहले से ही आर्थिक रूप से खास्ता हाल तेहरान की हालत और खराब हो रही है और यह प्रतिबंध दो देशों के बीच मैत्री सहयोग का उल्लंघन है।
ईरान ने दोनों देशों के बीच 1955 में हुए मैत्री सहयोग को हवाला देते हुए सीआईजे में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। इस समझौते में दोनों देशों में सहमति बनी थी कि वे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठायेंगे जिससे दोनों देशों के के सरकारी,अथवा निजी व्यापारिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचे। दोंनों देशों में इस बात पर भी सहमति बनी थी कि यदि दोनों पक्ष कूटनयिक माध्यम से मतभेदों को दूर नहीं कर पायेंगे तो मामले को सीआईजे में ले जाया जाएगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के कानूनी सलाहकार जेनिफर न्यूस्टेड ने इस मामले में मौखिक तर्क के दूसरे दिन कहा कि 1955 की संधि पर आधारित ईरान की अपील एक कानूनी पैंतरेबाजी है।
संजय आशा
रायटर
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