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श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने के लिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना जरूरी है। नेपाल के पशुपतिनाथ, मुक्तिधाम और जनकपुर धाम में बड़ी संख्या में भारतीय आते हैं। भारत और दुनिया के करोड़ों शिवभक्तों की इच्छा होती है कि वे कम से कम एक बार पशुपतिनाथ जरूर आये। वे यहाँ आकर इस धर्मशाला में ठहर सकेंगे।
भारत और नेपाल के संबंधों का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा, “ बाबा पशुपतिनाथ और विश्वनाथ (काशी) भारत और नेपाल को जोड़ते हैं। नेपाल के लुम्बिनी (महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली) ने ‘गौतम’ दिया तो भारत के गया (ज्ञान प्राप्ति स्थल) ने ‘बुद्ध’ दिया।”
गुजरात के सोमनाथ मंदिर का भी जिक्र करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि कहीं न कहीं यह भगवान शिव की कृपा है कि ‘सोमनाथ के बेटे’ (मोदी) को वाराणसी के विश्वनाथ और काठमांडू के पशुपतिनाथ से भी जुड़ने का मौका मिला है।
उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के साथ मिलकर पशुपतिनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को यह नजराना देने का मौका उन्हें मिला है। उन्होंने कहा कि आज भारत में भी लोग खुश होंगे और नेपाल में भी।
श्री मोदी ने कहा कि जब सामान्य आय वाले श्रद्धालु भी ऐसी सुविधा का लाभ उठायेंगे तो नेपाल के पर्यटन से जुड़ी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, तब पर्यटकों का भी रुकने का मन करेगा।
कुल 10,625 वर्ग मीटर में फैले इस तीन मंजिला धर्मशाला में 400 बिस्तरों की सुविधा है। इसके निर्माण के लिए भारत ने 22 करोड़ नेपाली रुपया (लगभग 14 करोड़ भारतीय रुपये) की मदद दी है। यहाँ तीर्थयात्रियों के लिए कई प्रकार की आधुनिक सुविधाएँ हैं।
इसका फ्लोर एरिया 6,100 वर्ग मीटर है तथा एक बिस्तर, दो बिस्तरों, चार बिस्तरों और 10 बिस्तरों वाले कमरे हैं। इसमें भोजनालय, पाकशाला, पुस्तकालय, बहुद्देशीय हॉल, जलशोधन संयंत्र, सौर हीटर और जेनरेटर कक्ष भी हैं। इसका निर्माण सितंबर 2016 में शुरू हुआ था। भारत सरकार ने आज इसे पशुपति क्षेत्र विकास न्यास को सौंप दिया जिस पर धर्मशाला के संचालन की जिम्मेदारी होगी।
अजीत.श्रवण
वार्ता
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