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श्री कोविंद ने कहा कि इसके अलावा भी और प्रयास किए गए हैं और ऋण शोधन क्षमता तथा दिवालिया कोड के लागू होने जाने से अच्छा कारोबार नहीं करने वालोें के इस क्षेत्र से जाने में मदद मिली है।
उन्हाेंने दोनों देशों के बीच के एेतिहासिक संबंधाें का जिक्र करते हुए कहा,“ भारत में इस बात को काफी शिद्दत के साथ याद किया जाता है कि 50 वर्ष पहले साइप्रस ने महात्मा गांधी की शताब्दी पर दो डाक टिकट जारी किए थे और ये डाक टिकट अभी भी संग्रहकर्ताओं के पास हैं। यह भी एक संयाेग ही है कि मेरी यात्रा दाे अक्टूबर से कुछ हफ्तों पहले हो रही है जब हम उनकी जंयती की 150 वीं वर्षगांठ मनाने का दो वर्षीय कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं।”
श्री कोविंद ने कहा कि महात्मा गांधी और आर्कबिशप माकारियोज किसी एक देश के नहीं हो सकते हैं और वे मानवता की धरोहर का हिस्सा हैं। उन्होंने ग्रीक के पादरी और राजनीतिग्य माकारियोज तृतीय को श्रद्धांजलि देते हुए यह बात कही जो साइप्रस चर्च के आर्कबिशप और प्राइमेट और चर्च पद पर भी 1950 से 1977 तक रहे थे।
वह साइप्रस के पहले राष्ट्रपति (1960 से 1977) थे अौर तीन बार के राष्ट्रपति कार्यकाल में उन पर चार बार जानलेवा हमले हुए तथा एक बार तख्तापलट की नाकाम कोशिश भी हुई।
उन्होंने कहा कि भारत और साइप्रस जिम्मेदार राष्ट्र होने के नाते अंतरराष्ट्रीय प्रकिया के समक्ष आ रही चुनौतियों का सामना करने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि सभ्यताओं के तौर पर हम हजारों वर्षाें से खुले समाजों अौर व्यापारिक अर्थव्यव्स्थाओं के तौर पर रह चुके हैं अौर व्यापार, समुद्री क्षेत्र तथा वैश्विक समुद्री क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों में नियम तथा प्रकिया आधारित प्रणाली की लगातार प्रासंगिकता हमारे लिए भरोसे का प्रतीक है।
जितेन्द्र.श्रवण
वार्ता
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