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दुनिया


कोविंद ने सोफिया में भारतीय विद्वानों को किया नमन

सोफिया, 05 सितंबर(वार्ता) राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने भारत में पांच सितंबर को मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस पर यहां कहा कि भारतीय शिक्षकों, विद्धानों और बुद्धिजीवियों ने सीखने-सिखाने अौर विवेक की सदियों पुरानी परंपरा को आत्मसात करते हुए ज्ञान के क्षेत्र में देश को महाशकित बनाने में योगदान दिया है।
श्री कोविंद ने बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में “ शिक्षा बदलाव और साझा समृद्धि का एक कारक” विषय पर अपने संबोधन में कहा “ विभिन्न महाद्वीपों में भारतीय विद्वानों और शोधकर्ताओं की अकादमिक उत्कृष्टता को पहचाना गया है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ज्ञान के ढांचे में वृद्धि हुई है और भारत की अलग पहचान बनी है।”
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी नाटकीय बदलावों वाला तकनीकी परिवर्तन का समय है अौर चौथी औद्योगिक क्रांति, कृत्रिम बौद्धिकता, रोबोटिक्स का विकास तथा थ्री डी एंव निर्माण की सटीक तकनीकें लोगों के जीवन तथा काम करने के तरीकों में बदलाव ला रही हैं। श्री कोविंद ने कहा कि डिजीटल तकनीकों के कारण हम उन क्षेत्रों में जाने में सक्षम है जहां पहले पहुंचना बिल्कुल भी संभव नहीं था।
राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीक अौर डिजिटल क्रांति को युवा वर्ग शिक्षण संस्थानों के परिसरों से संचालित कर रहा है और 21 वीं सदी के विश्वविद्यालय केवल डिग्री उपलब्ध कराने वाले ही नहीं है बल्कि वे नवाचार, उद्यमिता और स्टार्ट अप तथा छोटे कारोबार को बढ़ावा देने वाले केन्द्र भी हैं जहां तकनीक और सृजनात्मक विचार मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं।
उन्हाेंने कहा कि इस समय भारत में वास्तविक तौर पर एक क्रांति पैदा हो रही है जिसने भारत को विश्व में तीसरा बड़ा नवाचार और स्टार्टअप हब बना दिया है। इससे न केवल राेजगार के अवसर पैदा हो रहे है बल्कि बौद्धिक संपदा में भी इजाफा हो रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक भारत का शोध एवं विकास निवेश का आंकड़ा बढ़कर 83 अरब अमेरिकी डालर तक पहुंचने का अनुमान है। श्री कोविंद ने बुल्गारिया के छात्रों को इस प्रकिया का हिस्सा बनने को न्योता देते हुए कहा कि यह एक रोमांचक परिस्थितिक तंत्र है।
गौरतलब है कि श्री कोविंद साइप्रस, बुल्गारिया और चेक गणराज्य की यात्रा के दूसरे चरण में हैं।
जितेन्द्र
वार्ता
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