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पचलखा ‘सलमान’ का नहीं मिल रहा है खरीददार

पचलखा ‘सलमान’ का नहीं मिल रहा है खरीददार

लखनऊ 11 अगस्त (वार्ता) फर्ज-ए-कुर्बानी का पर्व बकरीद की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बकरों की बिक्री पूरे शवाब पर रही हालांकि महंगाई के चलते खरीददारों की भीड़ में मामूली कमी दर्ज की गयी।

पुराने लखनऊ के बकरामंडी में बकरों की बिक्री के लिये काराेबारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान सलमान नामक बकरा खरीददारों के आकर्षण का केन्द्र रहा। पांच लाख रूपये के कीमत वाले इस बकरे की खासियत है कि इसके गले और पेट पर कुदरती तौर पर ‘अल्लाह’ का नाम लिखा है।

बकरे के मालिक अब्दुल ने बताया “ मेरे लिये यह छोटे भाई की तरह है। बचपन से लेकर अब तक सलमान को अपने साथ रखता हूं। यहां तक कि उसे आरामदेह बिस्तर और तकिया बगैरह दिया जाता है। कुर्बानी के लिये इस बकरे को मंडी पर भरे मन से लाया हूं। इसकी कीमत पांच लाख रूपये रखी गयी है। अब तक इसकी बोली दो लाख 75 हजार रूपये तक लग चुकी है। ”

अब्दुल ने कहा कि पांच लाख रूपये से कम इसको बेचने का सवाल ही नहीं उठता। अगर कोई खरीददार नहीं मिला तो वापस अपने साथ घर ले जाऊंगा।

उधर, बकरामंडी में पांच हजार रूपये से शुरू होने बिक्री में एक से बढकर एक बेहतर नस्ल के बकरे शामिल है। एक दुकानदार रईस अहमद ने कहा कि बाराबंकी से वह करीब 250 बकरे दो दिन पहले लेकर आया था जिसमें अभी 25 बकरे बिक्री के लिये बचे है। बकरों के लालन पालन में काफी खर्चा होता है, इस लिहाज से कीमत अधिक नहीं है लेकिन अब खरीददार स्मार्ट हो गया है और दस जगह माेलभाव करके बकरे खरीदता है।

गौरतलब है कि इस्लाम में गरीबों और मजलूमों का खास ध्यान रखने की परंपरा है। इसी वजह से बकरीद पर भी गरीबों का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं जिसमें एक हिस्सा खुद के लिए और शेष दो हिस्से समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांट दिए जाते हैं। ऐसा करके मुस्लिम इस बात का पैगाम देते हैं कि अपने दिल की करीबी चीज़ भी हम दूसरों की बेहतरी के लिए अल्लाह की राह में कुर्बान कर देते हैं।

प्रदीप

वार्ता

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