Monday, Jul 13 2020 | Time 06:35 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • निकारागुआ के विला एल कारमेन पर भूकंप के तेज झटके
  • अमेरिका की नौसेना के सैन डिएगो बेस पर आग लगने से 21 लोग घायल
  • ब्राजील में कोरोना मृतकों की संख्या 72100 पहुंची
  • तुर्की में कोरोना के 1012 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 212,993 हुई
  • यमन में हवाई हमले में 10 नागरिकों की मौत-हाउती टीवी
  • चीन में बाढ़ से 141 लोगों की मौत
  • महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में होगी कोरोना प्रयोगशाला- ठाकरे
मनोरंजन » जानीमानी हस्तियों का जन्म दिन


गजल गायकी को नया आयाम दिया पंकज उधास ने

गजल गायकी को नया आयाम दिया पंकज उधास ने

जन्मदिवस 17 मई के अवसर पर

मुंबई 16 मई (वार्ता) संगीत जगत में पंकज उधास एक ऐसे गजल गायक हैं जो अपनी गायकी से पिछले चार दशक से श्रोताओ को मंत्रमुग्ध किए हुए हैं।

पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को गुजरात के राजकोट के निकट जेटपुर में जमींदार गुजराती परिवार में हुआ। उनके बड़े भाई मनहर उधास जाने माने पाश्र्वगायक है। घर में संगीत के माहौल से पंकाज उधास की भी रूचि संगीत की ओर हो गयी। महज सात वर्ष की उम्र से ही पंकज उधास गाना गाने लगे।उनके इस शौक को उनके बड़े भाई मनहर उधास ने पहचान लिया और उन्हें इस राह पर चलने के लिये प्रेरित किया। मनहर उधास अक्सर संगीत से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया करते थे। उन्होंने पंकज उधास को भी अपने साथ शामिल कर लिया।

एक बार पकंज को एक संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेने का मौका मिला जहां उन्होंने .ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी (गीत गाया। इस गीत को सुनकर श्रोता भाव.विभोर हो उठे। उनमें से एक ने पंकज उधास को खुश होकर 51 रूपये दिये। इस बीच पंकज उधास राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी से जुड़ गये और तबला बजाना सीखने लगे।


कुछ वर्ष के बाद पंकज उधास का परिवार बेहतर जिंदगी की तलाश में मुंबई आ गया । पंकज उधास ने अपनी स्नातक की पढ़ाई मुंबई के मशहूर सैंट जेवियर्स कॉलेज से हासिल की । इसके बाद उन्होंने स्नाकोत्तर पढ़ाई करने के लिये दाखिला ले लिया लेकिन बाद में उनकी रूचि संगीत की ओर हो गयी और उन्होंने उस्ताद नवरंग जी से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी।पंकज उधास के सिने कैरियर की शुरूआत 1972 में प्रदर्शित फिल्म (कामना) से हुयी लेकिन कमजोर पटकथा और निर्देशन के कारण फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह असफल साबित हुयी ।

इसके बाद गजल गायक बनने के उद्देश्य से पंकज उधास ने उर्दू की तालीम हासिल करनी शुरू कर दी । वर्ष 1976 में पंकज उधास को कनाडा जाने का अवसर मिला और वह अपने एक मित्र के यहां टोरंटो में रहने लगे । उन्हीं दिनों अपने दोस्त के जन्मदिन के समारोह में पंकज उधास को गाने का अवसर मिला । उसी समारोह में टोरंटो रेडियो में हिंदी के कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले एक सज्जन भी मौजूद थे उन्होंने पंकज उधास की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें टोरंटो रेडियो और दूरदर्शन में गाने का मौका दे दिया ।लगभग दस महीने तक टोरंटो रेडियो और दूरदर्शन में गाने के बाद पंकज उधास का मन इस काम से उब गया ।

इस बीच कैसेट कंपनी के मालिक मीरचंदानी से उनकी मुलाकात हुयी और उन्हें अपनी नई एलबम आहट में पार्श्वगायन का अवसर दिया। यह अलबम श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ । वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म नाम पंकज उधास के सिने कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक है । यूं तो इस फिल्म के लगभग सभी गीत सुपरहिट साबित हुये लेकिन पंकज उधास की मखमली आवाज में चिट्ठी आई है वतन से चिटी आई है गीत..आज भी श्रोताओ की आंखो को नम कर देता है । इस फिल्म की सफलता के बाद पंकज उधास को कई फिल्मों में पार्श्ववगायन का अवसर मिला ।


इन फिल्मों में गंगा जमुना सरस्वती,बहार आने तक, थानेदार, साजन, दिल आश्ना है, फिर तेरी कहानी याद आई, ये दिल्लगी, मोहरा, मै खिलाड़ी तू अनाड़ी, मंझधार, घात, और ये है जलवा, प्रमुख है।पंकज उधास के गाये गीतों की संवदेनशीलता उनकी निजी जिन्दगी में भी दिखाई देती थी । वह एक सरल हृदय के संवदेशनशील इंसान भी है जो दूसरों के दुख.दर्द को अपना समझकर उसे दूर करने का प्रयास करते है । दूसरों के प्रति हमदर्दी और संवेदनशीलता की इस भावना को प्रदर्शित करने वाला एक वाकया है ।

एक बार मुंबई के नानावती अस्पताल से एक डाक्टर ने पंकज उधास को फोन किया कि एक व्यक्ति के गले के कैंसर का आपरेशन हुआ है और उसकी उनसे मिलने की तमन्ना है। इस बात को सुनकर पंकज उधास तुरंत उस शख्स से मिलने अस्पताल गए और न सिर्फ उसे गाना गाकर सुनाया बल्कि अपने गाये गाने का कैसेट भी दिया । बाद में पंकज उधास को जब इस बात का पता चला कि उसके गले का ऑपेरशन कामयाब रहा है और उसकी बीमारी धीरे-धीरे ठीक हो रही है तो पंकज उधास काफी खुश हुये । पंकज उधास को अपने कैरियर में मान सम्मान भी खूब मिला।

इनमें सर्वश्रेष्ठ गजल गायक .के.एल.सहगल अवार्ड .रेडियो लोटस अवार्ड .इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी अवार्ड.दादाभाई नौरोजी मिलेनियम अवार्ड और कलाकार अवार्ड जैसे कई पुरस्कार शामिल है । साथ ही गायकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुये उन्हें 2006 में पदमश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया । पंकज उधास अब तक 40 एलबम के लिये पाश्र्वगायन कर चुके है। इनमें नशा, हसरत, महक, घूंघट, नशा 2, अफसाना, आफरीन, नशीला, हमसफर, खूशबू और टुगेदर, प्रमुख है । पंकज उधास आज भी अपने पार्श्वगायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

 

More News
चुरा लिया है तुमने जो दिल को

चुरा लिया है तुमने जो दिल को

26 Jun 2020 | 12:22 PM

मुंबई 26 जून (वार्ता) बॉलीवुड में अपनी मधुर संगीत लहरियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले महान संगीतकार आर.डी.बर्मन आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन फिजां के कण..कण में उनकी आवाज गूंजती हुयी महसूस होती है जिसे सुनकर श्रोताओं के दिल से बस एक ही आवाज निकलती है..चुरा लिया है तुमने जो दिल को..।

see more..
बिंदास अभिनय से पहचान बनायी करिश्मा कपूर ने

बिंदास अभिनय से पहचान बनायी करिश्मा कपूर ने

25 Jun 2020 | 12:30 PM

.जन्मदिन 25 जून . मुंबई, 25 जून (वार्ता) बॉलीवुड में करिश्मा कपूर को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने अभिनेत्रियों को फिल्मों में परंपरागत रूप से पेश किये जाने के तरीके को बदलकर अपने बिंदास अभिनय से दर्शको के बीच अपनी खास पहचान बनायी।

see more..
अमरीश पुरी ने खलनायकी को नयी पहचान दी

अमरीश पुरी ने खलनायकी को नयी पहचान दी

22 Jun 2020 | 1:11 PM

मुंबई, 22 जून (वार्ता) रंगमंच से फिल्मों के रूपहले पर्दे तक पहुंचे अमरीश पुरी का नाम ऐसे दमदार कलाकार के तौर पर लिया जाता है जिन्होंने अपनी कड़क आवाज, रौबदार भाव- भंगिमाओं और दमदार अभिनय के बल पर खलनायकी को एक नयी पहचान दी ।

see more..
दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच पहचान बनायी राज बब्बर ने

दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच पहचान बनायी राज बब्बर ने

22 Jun 2020 | 1:04 PM

मुंबई, 22 जून (वार्ता) बॉलीवुड में राज बब्बर को ऐसे अभिनेता के तौर पर शुमार किया जाता है, जिन्होंने दमदार अभिनय से समानांतर सिनेमा के साथ ही व्यावसायिक सिनेमा में भी दर्शको के बीच अपनी खास पहचान बनायी।

see more..
फिजांओं में आज भी गूंजती हेमंत कुमार के संगीत की खूशबू

फिजांओं में आज भी गूंजती हेमंत कुमार के संगीत की खूशबू

16 Jun 2020 | 11:45 AM

..जन्मदिवस 16 जून .. मुंबई, 16 जून (वार्ता) फिल्म जगत को अपनी मधुर संगीत लहरियों से सजाने संवारने वाले महान संगीतकार और पार्श्व गायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय उर्फ हेमंत दा के गीत आज भी फिजां में गूंजते महसूस होते हैं।

see more..
image