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फाल्के पुरस्कार विजेता आशा पारेख ने दर्ज की फिल्मोत्सव में उपस्थिति;बताए अनुभव

फाल्के पुरस्कार विजेता आशा पारेख ने दर्ज की फिल्मोत्सव में उपस्थिति;बताए अनुभव

पणजी 27 नवंबर (वार्ता) दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अपने जमाने की प्रख्यात अभिनेत्री आशा पारेख ने भी यहां चल रहे भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्वस में अपनी उपस्थिति दर्ज की।

आशा पारेख को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 30 सितंबर को वर्ष 2020 के फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। वह लंबे समय के बाद यह पुरस्कार पाने वाली महिला सिने कलाकार हैं।

उन्होंने फिल्मोत्व के दौरान एक चर्चा में फाल्के पुरस्कार को पाने पर अपने आश्चर्य और खुशी को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैं यह पुरस्कार पाने वाली पहली गुजराती भी हूं। तो यह मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात थी, लेकिन इसे दिमाग में अंकित होने में दो दिन लग गए। मैं इसके लिए ईश्वरकी आभारी हूं , मेरे लिए यह बहुत बड़ा अप्रत्याशित समाचार था।”

सुश्री पारेख ने रविवार को ‘इन-कन्वर्सेशन’ सत्र में कटी पतंग, तीसरी मंजिल, दो बदन, मैं तुलसी तेरे आंगन की, बहारों के सपने जैसी विभिन्न फिल्मों में काम करने के अपने व्‍यापक अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि किस तरह से उन्होंने अभिनय के अलावा टीवी निर्देशन और प्रोडक्शन में भी अपना करियर बनाया।

उन्होंने कहा कि गुजराती धारावाहिक (सीरियल) ‘ज्योति’, जो काफी सफल रहा, ने उनमें आत्मविश्वास जगाया। इस टीवी सीरियल ने उन्हें और भी अधिक टीवी धारावाहिक पेश करने के लिए प्रेरित किया। सुश्री आशा पारेख को उनके टीवी सीरियल ‘कोरा कागज’ के लिए सबसे अधिक याद किया जाता है। सुश्री आशा पारेख द्वारा छोटे पर्दे पर प्रस्‍तुत किए गए अन्य टीवी धारावाहिकों में बाजे पायल, दाल में काला, और कुछ पल साथ तुम्हारा शामिल हैं।

सुश्री आशा पारेख ने फिल्म उद्योग से संबंधित विभिन्न संगठनों और संघों के साथ अपने जुड़ाव के बारे में बात की। वे 1994 से 2000 तक सिने आर्टिस्ट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष रहीं। वे भारत के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) की पहली महिला चेयरपर्सन भी थीं, जिन्होंने 1998- 2001 तक मानद पद संभाला था। उन्होंने सिने और टेलीविज़न आर्टिस्ट एसोसिएशन (सीआईएनटीएए) के कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य किया था।

सुश्री पारेख एक निपुण भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। एक बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते हुए उन्होंने ‘दिल देके देखो’ में पहली बार मुख्य नायिका की भूमिका निभायी और 95 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने कटी पतंग, तीसरी मंजिल, लव इन टोक्यो, आया सावन झूम के, आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश जैसी प्रसिद्ध फिल्मों में अभिनय किया है।

मनोहर.संजय

वार्ता

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