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पायरिया, मधुमेह नियंत्रण में बाधक,दिल की बीमारी का भी खतरा

पायरिया, मधुमेह नियंत्रण में बाधक,दिल की बीमारी का भी खतरा

(डाॅ़ आशा मिश्रा उपाध्याय से)

नयी दिल्ली 12 दिसंबर(वार्ता) दांतों की गंभीर बीमारी पायरिया के प्रति शुरु से सजग नहीं रहने पर मधुमेह नियंत्रण में मुश्किलें आती हैं और कोरोनरी आर्टरीज डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

मोतियों से चमकते दांत और मजबूत मसूड़ों में स्वस्थ जीवन का राज छुपा है। इनकी देखभाल में काेताही बरतने और समय-समय पर चिकित्सकीय जांच नहीं करवाने से सेहत के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) के दंत शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र के प्रमुख डॉ ओ पी खरबंदा ने ‘यूनीवार्ता’ को बताया,“ मधुमेह से बाईडाइरेक्शनल संबंध वाली दांतों की गंभीर बीमारी पायरिया का इलाज शुरु में नहीं किया गया तो इसकी रोकथाम मुश्किल हो जाती है। मुंह से बदबू आना, मसूड़ों में सूजन और इससे खून आना पायरिया के शुरुआती लक्ष्ण हैं। इसकी अगली अवस्था में पस फॉरमेशन के साथ-साथ दांताें की हड्डियां गलने लगती हैं जिसे शुरु में रोका जा सकता है। हड्डियां अगर 50 प्रतिशत तक गल जाती हैं तो इसे आगे बढ़ने रोका जा सकता है लेकिन यह सीमा पार होने के बाद केवल इसकी रफ्तार को कम किया जा सकता है ,इस पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं किया जा सकता।”

डॉ खरबंदा ने बताया कि जिस व्यक्ति को मधुमेह है उसे पायरिया के संबंध में अधिक जागरुक रहने की जरुरत है क्योंकि इस बीमारी में मधुमेह को नियंत्रण में रखना कठिन हो जाता है। मधुमेह और पायरिया के बीच बाईडाइरेक्शनल संबंध है। उन्होंने कहा,“ इस मामले में पायरिया की समस्या अधिक एक्सटेनसिव हो जाती है और दांतों की जड़े कमजोर हो जाती हैं जिससे मधुमेह से ग्रस्त लोगों के दांत सामान्य लोगों की तुलना में जल्दी गिरने लगते हैं। इसी प्रकार जो व्यक्ति पायरिया से जूझ रहा है उसका ग्लाइसेमिक कंट्रोल खराब होता है यानी उसे शुगर के स्तर को नियंत्रण में रखना कठिन हो जाता है। दोनों अवस्थाओं में हर छह माह में दांतों की उचित चिकित्सकीय जांच और उनकी संपूर्ण सेहत के प्रति सजग रहना तथा डाक्टरों की सलाह पर अमल करना अहम है। यह रोग अनुवांशिक भी होता है लेकिन समय से ध्यान रखने से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।”

डॉ खरबंदा ने दांतों को उत्तम स्वास्थ्य की पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि दांत उसकी स्थिति में चमक बनाये रख सकते हैं जब आप तंबाकू, सुपाड़ी ,सिगरेट ,गुटखा, अल्कोहल आदि के सेवन से दूर रहते हैं और कोई भी खाद्य एवं पेय पदार्थ मुंह में डालने के बाद पानी से कुल्ला और भोजन के बाद ब्रश करते हैं। इन सभी चीजों पर नियंत्रण से कैंसर समेत कई प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है ।”

उन्होंने नकली दांत पहने वाले लोगों खास कर बुजुर्गों को सचेत करते हुए कहा ,“ डेंचर को रात में पानी में रखने समेत सफाई के तमात उपायों के साथ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंह के किसी भी हिस्से में इससे रगड़ पड़ती है अथवा कट लगता है तो तुरंत इसे लगाना बंद कर दें और डॉक्टर से संपर्क करें। वरना, यदि इसके कारण 15 दिनों से अधिक समय तक जख्म बना रहता हैं तो इससे मुंह के कैंसर का खतरा हो सकता है। नुकीले और टूटे हुए दांत अगर मुंह में बार-बार लगते हैं और जख्म बनाते हैं तो इनके प्रति भी गंभीर रहने की जरुरत है। यह स्थिति भी कैंसर का रुप ले सकती है।”

उन्होंने पायरिया और दिल की बीमारी (कोरोनरी आर्टरीज डिजीज) के बीच संबंधों की चर्चा करते हुए पायरिया और दिल की बीमारी के संबंधों के बारे में बताया ,“ पायरिया से खून में इनफ्लेमेटरी तत्व पहुंते हैं और हार्ट के वेसेल्स में भी इसी तरह की इनफ्लेमेटरी प्रोसेस होती है जिससे कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।” डॉ खरबंदा ने कहा,“हमारे मुंह में लाखों बैक्टेरिया हैं जो खून में मिल कर हमारे हार्ट वल्व को प्रभावित करते हैं जिसे दिल की बीमारी की आशंका बढ़ जाती है।”

उन्होंने कहा कि पायरिया में सब एक्यूट बैक्टीरियल एंडोकार्डिटिस (सैब) का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी भी दिल को प्रभावित करती है। इस स्थिति में मुंह के बैक्टेरिया हमारे खून में मिल जाने के बाद दिल में जमा हो सकते हैं जिससे सब एक्यूट बैक्टीरियल एंडोकार्डिटिस बीमारी हो सकती है।

डॉ़ खरबंदा ने दांतों की समस्याओं के समाधान पर जोर देते हुए कहा,“दांतों की समस्याओं को भी हम इमरजेंसी की तरह लेंगे तो लंबे समय तक ‘मोतियों -सी मुस्कान’ बिखेर सकते हैं और उम्र दराज होने पर भी अपनी पंसदीदा वस्तुओं स्वाद तथा सर्दियों में धूप सेंकते हुए मूंगफली तोड़ने का आनंद ले सकते हैं। अनमोल हैं ये दांत ,इनकी चमक बरकरार रखें।”

आशा मिश्रा

वार्ता

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28 Nov 2019 | 4:20 PM

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