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राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नयी दिल्ली 23 सितम्बर (वार्ता) राज्यसभा के 252 वें सत्र की कार्यवाही कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न असाधारण स्थिति के मद्देनजर बुधवार को निर्धारित अवधि से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किये जाने से पहले अपने समापन वक्तव्य में कहा कि कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न असाधारण हालातों को देखते हुए सदन की कार्यवाही निर्धारित तिथि आगामी एक अक्टूबर से पहले आज ही स्थगित की जा रही है। सत्र की शुरूआत गत 14 सितम्बर को विशेष सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी एहतियाती कदमों के साथ शुरू हुई थी।

श्री नायडू ने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस सत्र में सदन की 18 बैठकें होनी थी लेकिन केवल 10 बैठकें ही हो सकी हैं। उन्होंने सत्र के दौरान हुए कामकाज पर संतोष व्यक्त किया लेकिन इस दौरान सदन में विपक्ष के व्यवहार को लेकर चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भविष्य में इस तरह का अशोभनीय आचरण नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि इस दौरान 25 विधेयक पारित किये गये और छह पेश किये गये। शून्यकाल में 92 और विशेष उल्लेख के तहत 62 मुद्दे उठाये गये। इसके अलावा रक्षा मंत्री ने चीन सीमा पर स्थिति और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा हर्षवर्धन ने कोरोना महामारी के संबंध में वक्तव्य दिये।

सभापति ने कहा कि इतिहास में पहली बार सदन के सदस्य छह विभिन्न स्थानों पर बैठे। संसद के दोनों कक्ष और दीर्घायें इसके लिए इस्तेमाल की गयी। सदन ने पहली बार शनिवार और रविवार को भी काम किया। इस दौरान साप्ताहिक अवकाश और भोजनावकाश नहीं लिया गया। हालाकि इस सत्र में असाधारण परिस्थितयों मद्देनजर समय की कमी को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल का संचालन नहीं किया गया।

सदन में कामकाम का प्रतिशत 100.47 रहा। सदन का 10 दिन में 38 घंटे 30 मिनट का कामकाज निर्धारित था जबकि सदन ने 38 घंटे 41 मिनट काम किया। शोरशराबे में तीन घंटे 15मिनट का समय बरबाद हो गया जबकि सदस्यों ने तीन घंटे 26 मिनट अतिरिक्त कामकाज किया। पिछले तीन सत्रों में सदन की उत्पादकता सर्वाधिक रही।

उन्होंने कहा कि दस बैठकों में 22 घंटे तीन मिनट का समय विधायी कार्यों में व्यतीत हुआ। सदन की कार्यवाही में कुल 198 सदस्यों ने हिस्सा लिया। सरकार ने 1567 अतारांकित प्रश्नों के उत्तर दिये। सदन के इतिहास में पहली बार उप सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया। लेकिन इसके लिए 14 दिन का समय आवश्यक होता है। इसलिए नोटिस स्वीकार नहीं किया गया।

श्री नायडू ने सत्र के दौरान सदन में हुए घटनाक्रम पर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है और ऐसी घटनाओं को टालने का प्रयास करने चाहिए। उन्हाेंने कहा कि सदन के संचालन के लिए नियमों का पालन आवश्यक है।

सभापति ने कहा कि संसद की कार्यवाही का लंबे समय तक बहिष्कार ठीक नहीं है। इससे सदस्य अपनी बात कहने के लिए प्रभावी मंच से वंचित हो जाते हैं।

सत्या संजीव

वार्ता

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