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मुगलकालीन चित्रकला और रागमाला का बेजोड़ संगम है रजा लाइब्रेरी

मुगलकालीन चित्रकला और रागमाला का बेजोड़ संगम है रजा लाइब्रेरी

रामपुर 01 अप्रैल (वार्ता) सदियों तक नवाबी सभ्यता के केन्द्र रहे उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित रजा लाइब्रेरी में संग्रहित पांडुलिपियां मुगलकालीन चित्रकला की अनूठी दास्तां बयां कर रही है वहीं रागमाला पर आधारित अलबम किसी का भी ध्यान बरबस अपनी ओर खींच लेता है।

लाइब्रेरी में हस्तनिर्मित लगभग 5000 लघुचित्र हैं जिसमें सबसे बड़ा भाग मुगल चित्रकला पर आधारित है। इन चित्रों अकबर एलबम, जहाँगीर एलबम एवं रागमाला पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बने रहते है। इन चित्रों को गुजरे जमाने के मशहूर चित्रकार मनोहर, फतेहचंद, बिशनदास, कान्हा, फर्रूखचेला, साँवला, नरसिंह, गोवर्धन, मुहम्मद आबिद आदि ने बनाया है।

लाइब्रेरी में सुरक्षित 35 रागमाला चित्रों का महत्वपूर्ण एलबम संकलित है, जिसका एक चित्र एलबम में नहीं है क्योंकि यह रागमाला एलबम 36 राग एवं रागनियों के आधार पर चित्रित है जिसमें राग व रागनियाँ सुंदर चित्रों, प्राकृतिक दृश्यों, देवी-देवताओं, युवा संगीतज्ञ पुरुष एवं महिलाएं, विभिन्न वस्तुएँ समय परिस्थितियों के माध्यम से दर्शाये गए हैं।

रागमाला एलबम में किसी चित्रकार अथवा समय का उल्लेख नही है लेकिन मुगल काल के अन्य चित्रों के साथ विश्लेषण कर इन चित्रों का समय भी 16वीं और 17वीं सदी का ज्ञात होता है। चित्र रचना का ढंग उस समय के बने अन्य चित्रों से मिलता है।

सं प्रदीप

जारी वार्ता

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