Wednesday, Apr 24 2019 | Time 12:13 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • रोहित शेखर की पत्नी अपूर्वा शुक्ला गिरफ्तार
  • टिकट न मिलने से नाराज भाजपा सांसद उदित राज कांग्रेस में शामिल
  • बेटे के लिए पिता का दौड़ना नई बात नहीं-गहलोत
  • कश्मीर में जनजीवन सामान्य
  • दिल्ली में गर्मी से बेहाल हुए लोग
  • राजस्थान में गांधी-मोदी के दौरे के बाद चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ा
  • राजस्थान में गांधी-मोदी के दौरे के बाद चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ा
  • जामिया मस्जिद एक दिन बंद रहने के बाद बुधवार को खुला
  • श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर बुधवार को नहीं चलेंगे निजी वाहन
  • श्रीलंका हमला: 18 और संदिग्ध गिरफ्तार
  • चीन में रसायन संयंत्र में विस्फोट, तीन लोगों की मौत
  • ‘आतंकवाद के खिलाफ न्यूजीलैंड-फ्रांस मिलकर करेंगे काम’
  • कश्मीर में एक दिन स्थगित रहने के बाद ट्रेन सेवा शुरू
  • आज का इतिहास (प्रकाशनार्थ 25 अप्रैल)
  • ट्रंप ने ट्वीटर के सीईओ से मुलाकात की
मनोरंजन


संगीतबद्ध गीतों से देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया सलिल ने

संगीतबद्ध गीतों से देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया सलिल ने

..पुण्यतिथि 5 सितंबर के अवसर पर..

मुंबई 04 सितंबर(वार्ता) भारतीय सिने जगत में सलिल चौधरी का नाम एक ऐसे संगीतकार के रूप मे याद किया जाता है जिन्होंने अपने संगीतबद्ध गीतों से लोगो के बीच देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया।

सलिल का जन्म 19 नवंबर 1923 को हुआ था । उनके पिता ज्ञानेन्द्र चंद्र चौधरी असम में डाक्टर के रूप में काम करते थे । सलिल का ज्यादातर बचपन असम में हीं बीता । बचपन के दिनों से ही सलिल का रूझान संगीत की ओर था। वह संगीतकार बनना चाहते थे। उन्होंने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नही ली थी । सलिल के बड़े भाई एक आर्केस्ट्रा में काम करते थे और इसी वजह से वह हर तरह के वाध यंत्रों से भली भांति परिचत हो गये। सलिल को बचपन के दिनों से हीं बांसुरी बजाने का बहुत शौक था। इसके अलावा उन्होंने पियानो और वायलिन बजाना भी सीखा।

सलिल ने अपनी स्नातक की शिक्षा कलकत्ता (कोलकाता) के मशहूर बंगावासी कॉलेज से पूरी की। इस बीच वह भारतीय जन नाटय् संघ से जुड़ गये। वर्ष 1940 मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। देश को स्वतंत्र कराने के लिये छिड़ी मुहिम में सलिल चौधरी भी शामिल हो गये और इसके लिये उन्होंने अपने संगीतबद्व गीतों का सहारा लिया। सलिल ने अपने अपने संगीतबद्व गीतों के माध्यम से देशवासियों मे जागृति पैदा की। अपने संगीतबद्व गीतों को गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप मे इस्तेमाल किया और उनके गीतों ने अंग्रेजो के विरूद्व भारतीयों के संघर्ष को एक नयी दिशा दी ।

वर्ष 1943 मे सलिल के संगीतबद्व गीतों ..बिचारपति तोमार बिचार .. और ..धेउ उतचे तारा टूटचे .. ने आजादी के दीवानों में नया जोश भरने का काम किया। अंग्रेज सरकार ने बाद में इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया। पचास के दशक में सलिल ने पूरब और पश्चिम के संगीत का मिश्रण करके अपना अलग हीं अंदाज बनाया जो परंपरागत संगीत से काफी भिन्न था । इस समय तक सलिल पश्चिम बंगाल में बतौर संगीतकार और गीतकार के रूप में अपनी खास पहचान बना चुके थे। वर्ष 1950 में अपने सपनों को नया रूप देने के लिये वह मुंबई आ गये।

         वर्ष 1950 में विमल राय अपनी फिल्म दो बीघा जमीन के लिये संगीतकार की तलाश कर रहे थे। वह सलिल के संगीत बनाने के अंदाज से काफी प्रभावित हुये और उन्होंने सलिल से अपनी फिल्म दो बीघा जमीन में संगीत देने की पेशकश की। सलिल ने संगीतकार के रूप में अपना पहला संगीत वर्ष 1952 में प्रदर्शित विमल राय की फिल्म ..दो बीघा जमीन ..के गीत .. आ री आ निंदिया ..के लिये दिया । फिल्म की कामयाबी के बाद सलिल बतौर संगीतकार फिल्मों में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये ।

फिल्म दो बीघा जमीन की सफलता के बाद इसका बंगला संस्करण ..रिक्शावाला .. बनाया गया । वर्ष 1955 में प्रदर्शित इस फिल्म की कहानी और संगीत निर्देशन सलिल ने ही किया था। फिल्म दो बीघा जमीन की सफलता के बाद सलिल विमल राय के चहेते संगीतकार बन गये और इसके बाद विमल राय की फिल्मों के लिये सलिल ने बेमिसाल संगीत देकर उनकी फिल्मो को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।

वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म ..काबुलीवाला .. में पार्श्वगायक मन्ना डे की आवाज में सजा यह गीत .. ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल कुर्बान .. आज भी श्रोताओं की आंखो को नम कर देता है । सत्तर के दशक में सलिल को मुंबई की चकाचौंध कुछ अजीब सी लगने लगी और वह कोलकाता वापस आ गये। उन्होंने इस बीच कई बंगला गानें लिखे। इनमें सुरेर झरना और तेलेर शीशी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुये । सलिल के सिने कैरियर में उनकी जोड़ी गीतकार शैलेन्द्र और गुलजार के साथ खूब जमी। सलिल के पसंदीदा पार्श्वगयिकों में लता मंगेश्कर का नाम सबसे पहले आता है। वर्ष 1958 मे विमल राय की फिल्म ..मधुमति .. के लिये सलिल को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।वर्ष 1998 में संगीत के क्षेत्र मे उनके बहूमूल्य योगदान को देखते हुये वह संगीत नाटय अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये ।

सलिल ने अपने चार दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 75 हिन्दी फिल्मों में संगीत दिया । हिन्दी फिल्मों के अलावा उन्होने मलयालम .तमिल .तेलगू .कन्नड़ .गुजराती .आसामी. उडि़या और मराठी फिल्मों के लिये भी संगीत दिया। लगभग चार दशक तक अपने संगीत के जादू से श्रोताओं को भावविभोर करने वाले महान संगीतकार सलिल पांच सितंबर 1995 को इस दुनिया को अलविदा कह गये ।

वार्ता

More News
भारत में सलमान अपने लुक को लेकर काफी सजग थे : जफर

भारत में सलमान अपने लुक को लेकर काफी सजग थे : जफर

24 Apr 2019 | 11:37 AM

मुंबई 24 अप्रैल (वार्ता) बॉलीवुड निर्देशक अली अब्बास जफर का कहना है कि सलमान खान फिल्म भारत में अपने लुक को लेकर बहुत सजग थे।

see more..
उड़नपरी का किरदार निभायेगी कैटरीना कैफ!

उड़नपरी का किरदार निभायेगी कैटरीना कैफ!

24 Apr 2019 | 11:28 AM

मुंबई 24 अप्रैल (वार्ता) बॉलीवुड की बार्बी गर्ल कैटरीना कैफ सिल्वर स्क्रीन पर उड़नपरी पी.टी.उषा का किरदार निभाती नजर आ सकती है।

see more..
रणबीर के साथ लिव-इन में रहने नहीं जा रही है आलिया

रणबीर के साथ लिव-इन में रहने नहीं जा रही है आलिया

24 Apr 2019 | 11:18 AM

मुंबई 24 अप्रैल (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट ने कहा है कि वह रणबीर कपूर के साथ लिव-इन में रहने नही जा रही है।

see more..
दक्षिण भारतीय फिल्म में खलनायक का किरदार निभायेंगे शाहरूख खान!

दक्षिण भारतीय फिल्म में खलनायक का किरदार निभायेंगे शाहरूख खान!

24 Apr 2019 | 11:05 AM

मुंबई 24 अप्रैल (वार्ता) बॉलीवुड के किंग खान शाहरूख खान दक्षिण भारतीय फिल्म थालापैथी 63 में खलनायक का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं।

see more..
शाहरूख को पसंद आया भारत का ट्रेलर

शाहरूख को पसंद आया भारत का ट्रेलर

23 Apr 2019 | 12:01 PM

मुंबई 23 अप्रैल (वार्ता) बॉलीवुड के किंग खान शाहरूख खान को सलमान खान की आने वाली फिल्म भारत का ट्रेलर पसंद आया है।

see more..
image