Monday, Sep 24 2018 | Time 11:43 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • मोदी ने किया सिक्किम के पहले हवाई अड्डे का उद्घाटन
  • रणवीर के साथ काम करना बेहतरीन अनुभव: कृति खरबंदा
  • अंतरिक्ष यात्री का किरदार निभायेंगे अक्षय कुमार
  • डोडा में भूस्खलन से पांच की मौत
  • दो दिन की वर्षा से गुजरात में मानसून के औसत में ढाई प्रतिशत का इजाफा
  • पाकिस्तान के दो मुख्य दल हो रहे हैं एकजुट
  • मूसलाधार बारिश से सहारनपुर में धान की फसल को भारी नुकसान
  • गंदेरबल में पुलिस की नाका टीम पर हमला
  • इम्फाल में विस्फोट, तीन घायल
  • अमेरिका और चीन के बीच तेज हुयी व्यापारिक जंग
  • क्यूबा के नए राष्ट्रपति अमेरिकी प्रतिबंध का करेंगे विरोध
  • मैक्रों की लोकप्रियता में आैर गिरावट : सर्वे
  • स्विट्जरलैंड के दूसरे प्रांत में भी बुर्का पर लगा प्रतिबंध
  • अपहृत नौका चालक दल के सदस्यों की हुई पहचान
  • मालदीव के राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी उम्मीदवार सोलिह जीते
मनोरंजन Share

संगीतबद्ध गीतों से देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया सलिल ने

संगीतबद्ध गीतों से देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया सलिल ने

..पुण्यतिथि 5 सितंबर के अवसर पर..

मुंबई 04 सितंबर(वार्ता) भारतीय सिने जगत में सलिल चौधरी का नाम एक ऐसे संगीतकार के रूप मे याद किया जाता है जिन्होंने अपने संगीतबद्ध गीतों से लोगो के बीच देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया।

सलिल का जन्म 19 नवंबर 1923 को हुआ था । उनके पिता ज्ञानेन्द्र चंद्र चौधरी असम में डाक्टर के रूप में काम करते थे । सलिल का ज्यादातर बचपन असम में हीं बीता । बचपन के दिनों से ही सलिल का रूझान संगीत की ओर था। वह संगीतकार बनना चाहते थे। उन्होंने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नही ली थी । सलिल के बड़े भाई एक आर्केस्ट्रा में काम करते थे और इसी वजह से वह हर तरह के वाध यंत्रों से भली भांति परिचत हो गये। सलिल को बचपन के दिनों से हीं बांसुरी बजाने का बहुत शौक था। इसके अलावा उन्होंने पियानो और वायलिन बजाना भी सीखा।

सलिल ने अपनी स्नातक की शिक्षा कलकत्ता (कोलकाता) के मशहूर बंगावासी कॉलेज से पूरी की। इस बीच वह भारतीय जन नाटय् संघ से जुड़ गये। वर्ष 1940 मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। देश को स्वतंत्र कराने के लिये छिड़ी मुहिम में सलिल चौधरी भी शामिल हो गये और इसके लिये उन्होंने अपने संगीतबद्व गीतों का सहारा लिया। सलिल ने अपने अपने संगीतबद्व गीतों के माध्यम से देशवासियों मे जागृति पैदा की। अपने संगीतबद्व गीतों को गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप मे इस्तेमाल किया और उनके गीतों ने अंग्रेजो के विरूद्व भारतीयों के संघर्ष को एक नयी दिशा दी ।

वर्ष 1943 मे सलिल के संगीतबद्व गीतों ..बिचारपति तोमार बिचार .. और ..धेउ उतचे तारा टूटचे .. ने आजादी के दीवानों में नया जोश भरने का काम किया। अंग्रेज सरकार ने बाद में इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया। पचास के दशक में सलिल ने पूरब और पश्चिम के संगीत का मिश्रण करके अपना अलग हीं अंदाज बनाया जो परंपरागत संगीत से काफी भिन्न था । इस समय तक सलिल पश्चिम बंगाल में बतौर संगीतकार और गीतकार के रूप में अपनी खास पहचान बना चुके थे। वर्ष 1950 में अपने सपनों को नया रूप देने के लिये वह मुंबई आ गये।

         वर्ष 1950 में विमल राय अपनी फिल्म दो बीघा जमीन के लिये संगीतकार की तलाश कर रहे थे। वह सलिल के संगीत बनाने के अंदाज से काफी प्रभावित हुये और उन्होंने सलिल से अपनी फिल्म दो बीघा जमीन में संगीत देने की पेशकश की। सलिल ने संगीतकार के रूप में अपना पहला संगीत वर्ष 1952 में प्रदर्शित विमल राय की फिल्म ..दो बीघा जमीन ..के गीत .. आ री आ निंदिया ..के लिये दिया । फिल्म की कामयाबी के बाद सलिल बतौर संगीतकार फिल्मों में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये ।

फिल्म दो बीघा जमीन की सफलता के बाद इसका बंगला संस्करण ..रिक्शावाला .. बनाया गया । वर्ष 1955 में प्रदर्शित इस फिल्म की कहानी और संगीत निर्देशन सलिल ने ही किया था। फिल्म दो बीघा जमीन की सफलता के बाद सलिल विमल राय के चहेते संगीतकार बन गये और इसके बाद विमल राय की फिल्मों के लिये सलिल ने बेमिसाल संगीत देकर उनकी फिल्मो को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।

वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म ..काबुलीवाला .. में पार्श्वगायक मन्ना डे की आवाज में सजा यह गीत .. ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल कुर्बान .. आज भी श्रोताओं की आंखो को नम कर देता है । सत्तर के दशक में सलिल को मुंबई की चकाचौंध कुछ अजीब सी लगने लगी और वह कोलकाता वापस आ गये। उन्होंने इस बीच कई बंगला गानें लिखे। इनमें सुरेर झरना और तेलेर शीशी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुये । सलिल के सिने कैरियर में उनकी जोड़ी गीतकार शैलेन्द्र और गुलजार के साथ खूब जमी। सलिल के पसंदीदा पार्श्वगयिकों में लता मंगेश्कर का नाम सबसे पहले आता है। वर्ष 1958 मे विमल राय की फिल्म ..मधुमति .. के लिये सलिल को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।वर्ष 1998 में संगीत के क्षेत्र मे उनके बहूमूल्य योगदान को देखते हुये वह संगीत नाटय अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये ।

सलिल ने अपने चार दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 75 हिन्दी फिल्मों में संगीत दिया । हिन्दी फिल्मों के अलावा उन्होने मलयालम .तमिल .तेलगू .कन्नड़ .गुजराती .आसामी. उडि़या और मराठी फिल्मों के लिये भी संगीत दिया। लगभग चार दशक तक अपने संगीत के जादू से श्रोताओं को भावविभोर करने वाले महान संगीतकार सलिल पांच सितंबर 1995 को इस दुनिया को अलविदा कह गये ।

वार्ता

More News
एकता कपूर ने शादी नहीं करने की बतायी वजह

एकता कपूर ने शादी नहीं करने की बतायी वजह

23 Sep 2018 | 12:06 PM

मुंबई 23 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड फिल्मकार एवं अभिनेता जीतेन्द्र की सुपुत्री एकता कपूर ने शादी नहीं करने की वजह बतायी है।

 Sharesee more..
सलमान को बेहतरीन अभिनेता मानती है कैटरीना

सलमान को बेहतरीन अभिनेता मानती है कैटरीना

23 Sep 2018 | 11:55 AM

मुंबई 23 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड की बार्बी गर्ल कैटरीना कैफ ,दबंग स्टार सलमान खान को शाहरूख खान और आमिर खान की तुलना में बेहतरीन अभिनेता मानती हैं।

 Sharesee more..
अच्छी स्क्रिप्ट मिलने पर नेगेटिव किरदार निभायेगी काजोल

अच्छी स्क्रिप्ट मिलने पर नेगेटिव किरदार निभायेगी काजोल

23 Sep 2018 | 11:43 AM

मुंबई 23 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का कहना है कि वह अच्छी स्क्रिप्ट मिलने पर ही नेगेटिव किरदार निभायेगीं।

 Sharesee more..
बिंदास अदाओं से दीवाना बनाया तनुजा ने

बिंदास अदाओं से दीवाना बनाया तनुजा ने

22 Sep 2018 | 1:42 PM

..जन्मदिवस 23 सितम्बर . मुंबई 22 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड में तनुजा को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने अभिनेत्रियों को फिल्मों में परंपरागत रूप से पेश किये जाने के तरीके को बदलकर अपने बिंदास अभिनय से दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनायी।

 Sharesee more..
image