Tuesday, Feb 18 2020 | Time 11:27 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • कश्मीर में सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी
  • विजय माल्या की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली
  • हॉलीवुड में अभी काम नहीं करना चाहती हैं दिशा पटानी
  • ‘मलंग’ की सफलता से खुश हैं आदित्य राॅय कपूर
  • कबीर सिंह जैसा किरदार निभाना चाहते हैं वरुण धवन
  • बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे पंकज मल्लिक
  • बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे पंकज मल्लिक
  • वैकल्पिक वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित कार्यशाला प्रारंभ
  • बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे पंकज मल्लिक ने
  • हॉलीवुड में अभी काम नहीं करना चाहती हैं दिशा पटानी
  • हॉलीवुड में अभी काम नहीं करना चाहती हैं दिशा पटानी
  • ‘मलंग’ की सफलता से खुश हैं आदित्य राॅय कपूर
  • ‘मलंग’ की सफलता से खुश हैं आदित्य राॅय कपूर
  • पराग्वे ने दक्षिण अमेरिकी देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई
  • कबीर सिंह जैसा किरदार निभाना चाहते हैं वरुण धवन
फीचर्स


इविवि के छात्र करेंगे प्रवासी भारतीयों पर शोध

इविवि के छात्र करेंगे प्रवासी भारतीयों पर शोध

प्रयागराज,01 सितम्बर (वार्ता) पूरब का आक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र प्रवासी भारतीयों पर शोध करेंगे कि उन्होने कैसे अन्य देशों को अपना ठौर बनाया।

        मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी ने रविवार को बताया कि बड़ी संख्या में भारतीय मॉरिशस, सूरीनाम, कनाड़ा, अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, मलेशिया, आदि अनेक देशों में जाकर बस गए हैं। शोध छात्र इनके बारे में जानकारी एकत्र करेंगे कि वह कब, कहां, क्यों गए। वहां जाने के बाद कैसे खुद को स्थापित किया और साथ ही भारतीय परंपराओं को आत्मसात किए रखा।

        उन्होने बताया कि प्रवासी भारतीयों के बारे में जानकारी देने के लिए कुलपति प्रो. आरएल हांगलू की पहल पर सेंटर ऑफ डायस्पोरा स्टडीज खोला गया है जिसका उन्हें कोआर्डिनेटर बनाया गया है। श्री हांगलू ने प्रवासी भारतीयों पर 'इंडियन डायस्पोरा इन द कैरेबियन' नाम से पुस्तक लिखी है। कई और विद्वानों की प्रवासी भारतीयों पर लिखी किताबों को भी छात्र अपने शोध का आधार बना सकेंगे।

       प्रो तिवारी ने कहा कि प्रवासियों को अपने देश के प्रति स्नेह इसी बात से परिलक्षित होता है कि वह प्रत्येक वर्ष संस्कृति एवं आस्था देखने विदेश से आते हैं। यह सभी बातें छात्रों के शोध का हिस्सा बनेंगी। उन्होने कहा कि मारीशस के प्रधानमंत्री जगन्‍नाथ के नेतृत्‍व में वहां का एक दल कुंभ मेले में आकर पतित पावनी में आस्था की डुबकी लगाया और मेले

में स्वच्छता और भव्यता देख आत्मविभोर हो गये।

विभागाध्यक्ष ने कहा कि यही प्रवासी अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहां की आर्थिक एवं राजनीतिक दशा तथा दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां उनकी आर्थिक, शैक्षणिक व व्यावसायिक दक्षता का आधार काफी मजबूत है। वे विभिन्न देशों में रहते हैं, अलग भाषा बोलते हैं परन्तु वहां के विभिन्न क्रियाकलापों में अपनी महती भूमिका निभाते हैं। प्रवासी भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के कारण ही साझा पहचान मिली है और यही कारण है जो उन्हें भारत से गहरे जोड़ता है।

         प्रो तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कश्मीर से अधिनियम 370 समाप्त करना साहसिक कदम रहा है।  कश्मीर में अधिनियम 370 और 35-ए बने रहने से एक ही देश में हमें प्रवासी की तरह रहना पडता था।

         कोआर्डिनेटर ने कहा कि जहां-जहां प्रवासी भारतीय बसे वहां उन्होंने आर्थिक तंत्र को मजबूती प्रदान की और बहुत कम समय में अपना स्थान बना लिया। वे मजदूर, व्यापारी, शिक्षक अनुसंधानकर्ता, खोजकर्ता, डाक्टर, वकील, इंजीनियर, प्रबंधक, प्रशासक आदि के रूप में दुनियाभर में स्वीकार किए गए। कई देशों में वहां के मूल निवासियों की अपेक्षा भारतवंशियों की प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है।

        वैश्विक स्तर पर सूचना तकनीक के क्षेत्र में क्रांति में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके कारण भारत की विदेशों में छवि निखरी है। प्रवासी भारतीयों की सफलता के कारण भी आज भारत आर्थिक विश्व में आर्थिक

महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।

        उन्होने कहा कि कई प्रवासी भारतीय अब भी विदेशों में भारतीय संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित कर रहे हैं। प्रो. तिवारी ने बताया कि कुलपति ने इस शैक्षिक सत्र में पीएचडी की चार सीटों पर प्रवेश होगा। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में शोध के लिए शैक्षिक सत्र 2019-20 में चार सीटों पर शोध कार्य शुरू करने की मंजूरी मिल गयी है। उन्होंने बताया कि सेंटर ऑफ डायस्पोरा स्टडीज की मंजूरी 2016 में मिल गई थी। फैकल्टी न/न होने के कारण सेंटर में कोर्स का संचालन नहीं शुरू हो सका है।  अगले सत्र से फैकल्टी की नियुक्ति होने पर परास्नातक की कक्षाएं शुरू की जाएगी।

दिनेश प्रदीप

वार्ता

More News
डिफेंस एक्सपो: एमबीडीए के उत्पाद बनेंगे आकर्षण का केन्द्र

डिफेंस एक्सपो: एमबीडीए के उत्पाद बनेंगे आकर्षण का केन्द्र

03 Feb 2020 | 10:52 PM

लखनऊ 03 फरवरी (वार्ता) मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी एकीकृत बहु-राष्‍ट्रीय कंपनी एमबीडीए पांच फरवरी से यहां शुरू होने वाले डिफेंस एक्सपो-2020 में भारतीय सेना समेत अन्य देशों को अपने मारक रक्षा उत्पादों के जरिये आकर्षित करेगा।

see more..
दुनिया में धाक जमाने को तैयार डीआरडीओ

दुनिया में धाक जमाने को तैयार डीआरडीओ

02 Feb 2020 | 8:03 PM

लखनऊ 02 फरवरी (वार्ता) पिछले साल 27 मार्च को ए सेट तकनीक से लैस उपग्रह रोधी मिसाइल (इंटरसेप्टर) के सफल प्रक्षेपण के जरिये दुनिया में धाक जमाने वाला रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआडीओ) पांच दिसम्बर से यहां शुरू होने वाले डिफेंस एक्सपो-2020 विश्व की दिग्गज कंपनियों के सामने अपने बेहतरीन रक्षा उत्पादों का प्रदर्शन करेगा।

see more..
अटूट आस्था का केंद्र है देव का त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर

अटूट आस्था का केंद्र है देव का त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर

31 Jan 2020 | 5:36 PM

औरंगाबाद, 31 जनवरी (वार्ता) बिहार में औरंगाबाद जिले के देव स्थित ऐतिहासिक त्रेतायुगीन पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर अपनी कलात्मक भव्यता के लिए प्रख्यात होने के साथ ही सदियों से देशी-विदेशी पर्यटकों, श्रद्घालुओं और छठव्रतियों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।

see more..
कान्हा की नगरी में रामभक्ति की सरयू प्रवाहित

कान्हा की नगरी में रामभक्ति की सरयू प्रवाहित

19 Jan 2020 | 6:21 PM

मथुरा, 19 जनवरी (वार्ता) गोवर्धन की तलहटी में आयोजित रामानन्दाचार्य जयन्ती महोत्सव में कान्हा की नगरी में राम भक्ति की सरयू प्रवाहित हो रही है।

see more..
बच्चों की बेहतर देखभाल करती है कामकाजी महिलायें

बच्चों की बेहतर देखभाल करती है कामकाजी महिलायें

11 Jan 2020 | 5:50 PM

लखनऊ,11 जनवरी (वार्ता) आमतौर पर माना जाता है कि नौकरी करने वाले दंपत्ति को संतान की बेहतर देखभाल करने में तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लेकिन एक शोध ने इस धारणा को न सिर्फ गलत साबित किया है बल्कि आधुनिकता का जीवन बसर करने वाली कामकाजी महिलाओं को योग्य मां करार दिया है।

see more..
image