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केंद्र की नीतियों के कारण लोग करना चाहते हैं भारत में निवेश: वेंकैया

केंद्र की नीतियों के कारण लोग करना चाहते हैं भारत में निवेश: वेंकैया

मुंबई, 12 जनवरी (वार्ता) भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार के कारोबार में सहूलियत के लिए किये गये सुधारों और नीतियों के कारण लोग मौजूदा समय में भारत में निवेश करना चाहते हैं।

श्री नायडू मुंबई में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित भागीदारी शिखर सम्मेलन 2019 के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए आज यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जनता विकास के पक्ष में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंत्र ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ है।

उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के संबंध मे कहा कि यह अब तक का सबसे क्रांतिकारी फैसला है। उन्होंने कहा कि दुनिया से आतंकवाद और भ्रष्टाचार का खात्म करने के लिए सभी देशों को एक साथ आने और एक-दूसरे का सहयोग करने की जरूरत है।

उपराष्ट्रपति ने अच्छे व्यापारिक माहौल के लिए शांति की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि शांति तभी स्थापित हो सकती है, जब दुनिया से आतंकवाद खत्म हो। हम सबको मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध लड़ना होगा। आतंकवाद का कोई जाति या धर्म नहीं होता। इसलिए हम सबको साथ आकर आतंकवाद को खत्म करने की दिशा में काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से लेकर और भी कई मंचों पर बात की जाती रही है। अब हमें बातचीत बंद कर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। हमें उन लोगों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं या उसे आर्थिक मदद मुहैया कराते हैं। इस सम्मेलन में करीब 40 देशों के प्रतिनिधि एवं कई देशों के मंत्री भी आए हुए हैं।

श्री नायडू आतंकवाद की भांति ही भ्रष्टाचार और काले धन पर भी प्रहार करते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि हमें इसे समाप्त करने के लिए भी साथ आना होगा। यह काम अकेले संभव नहीं है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि आज लोग एक देश में भ्रष्टाचार कर दूसरे देश में जाकर छुप जाते हैं। ऐसे लोगों को वापस भेजने के लिए और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए हमें आपस में समझौते करना चाहिए, ताकि उन्हें जल्दी से जल्दी सजा दिलाई जा सके।

इस अवसर पर केंद्रीय उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने विभिन्न देशों और भारत के बीच कृषि सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के देशों को भारत से भारी मात्रा में फल और सब्जियां भेजी जाती है। अगर आयात करने वाले देशों की देखरेख में ही मूल्य वर्धित कृषि उत्पाद तैयार किए जाएं तो इससे निर्यातक और आयातक दोनों देशों को फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया में मंदी के बावजूद भारत विकास की कहानी लिख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में एक स्थिर लोकतांत्रिक सरकार है और भारत की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से आगे बढ रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में विश्व बैंक ने भविष्यवाणी की थी कि कुछ ही वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था पांच खरब अमेरिकी डॉलर और 2030 तक 10 खरब अमेरिकी डॉलर हो सकती है।

त्रिपाठी, संतोष

वार्ता

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