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बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं ने बिजली वितरण के निजीकरण के नीति आयोग के प्रस्ताव का विरोध किया

चंडीगढ़, 12 जून (वार्ता) बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने नीति आयोग के ‘स्ट्रेटेजी पेपर‘ में बिजली वितरण के निजीकरण और शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में फ्रेंचाइजी मॉडल लागू करने के प्रस्ताव पर रोष व्यक्त करते हुए आज कहा कि बिजली सेक्टर में किसी भी प्रकार से निजीकरण करने की कोशिश की गई तो इसका प्रबल विरोध होगा|
आल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के प्रवक्ता विनोद कुमार गुप्ता ने आज यहां जारी बयान में बताया कि नीति आयोग के जारी स्ट्रेटेजी पेपर में उन्हीं बातों का उल्लेख है जो इलेक्ट्रिसिटी (एमेंडमेंट ) बिल 2014 और 2018 में सम्मिलित थीं | उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (एमेंडमेंट) बिल 2014 और 2018 पिछली लोकसभा में पारित न हो पाने के कारण लैप्स हो गए और नई लोकसभा में पुनः इस बिल को रखने के पहले बिजली कर्मचारियों व् इंजीनियरों से वार्ता होनी चाहिए| उन्होंने कहा कि फेडरेशन ने वार्ता हेतु केंद्रीय विद्युत् मंत्री आर के सिंह को पत्र भेजकर समय मांगा है|
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में पिछले 25 वर्षों में किये गए निजीकरण और फ्रेंचाइजी के सभी प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। ऐसे में इन्हीं असफल प्रयोगों को आगे बढ़ाने के नीति आयोग के प्रस्ताव पर जल्दबाजी में एकतरफा निर्णय लेने के बजाय केंद्र सरकार को बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर सार्थक ऊर्जा नीति बनानी चाहिए जिससे आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापरक सहज बिजली उपलब्ध हो सके|
उन्होंने कहा कि बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग विफल रहा है और मात्र विघटन कर नई बिजली कंपनियों के गठन से घाटा तो निरंतर बढ़ ही रहा है, अनावश्यक प्रशासनिक खर्चे भी बढ़ गए हैं अतः बिजली कंपनियों के एकीकरण की जरूरत है जिससे उत्पादन , पारेषण और वितरण में बेहतर सामंजस्य हो सके| उन्होंने कहा कि विघटन के बाद की स्थिति यह है कि एक ओर उत्पादन और पारेषण कंपनियों को मुनाफे के नाम पर अरबों रुपये का आयकर देना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर वितरण कम्पनियां सरकार की दोषपूर्ण ऊर्जा नीति के चलते अरबों रुपये के घाटे में हैं| आयकर और घाटे दोनों की भरपाई अंततः आम उपभोक्ताओं से बिजली दरें बढ़ा कर की जा रही है जो किसी के हित में नहीं है|
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निजीकरण की कोई एकतरफा कार्यवाही की गई तो देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर राष्ट्रव्यापी आंदोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे|
महेश
वार्ता
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