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उत्तर प्रदेश-कार्तिक पूर्णिमा मेला दो अंतिम अमरोहा/हापुड़

ब्रजघाट एवं तिगरीधाम मेले के उद्घाटन के साथ देवोत्थानी एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा से जाग जाएंगे के दिन निर्धारित किया गया है। शुक्रवार को भगवान के जागते ही विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। आज को सुबह से ही गंगास्नान करते ही मेले में आए श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर तुलसी विवाह का भी आयोजन किया गया।
मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं। विद्वानों का मानना है कि श्रीहरि की निद्रा खुलने के दिन को देवोत्थान या देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी पुकारा जाता है। मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह शयन के बाद जागते हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में विवाह व अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
पूजा-अर्चना ' देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह शयन के बाद जागते हैं ' भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निद्रा में चले जाते हैं, प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और उनके जागने का आह्वान किया जाता है। इस दिन प्रात: काल उठकर ऊँ नमो नारायणाय
मेरे सर्व जगो,सर्वत्र जगो।
प्रभु आप जगो,प्रभु आप जगो।।
दुखान्तक खेल का अंत करो।
प्रभु अंत करो,अब अंत करो ।।
सुखान्तक खेल प्रकाश करो।
प्रभु आप जगो, परमात्म जगो।।
मेरे सर्व जगो,सर्वत्र जगो।
प्रभु आप जगो परमात्म जगो।।
व्रत का संकल्प लेने के साथ ही भगवान विष्णु का ध्यान और उनके चरणों की आकृति तथा एकओखली में गेरू से चित्र बनाकर फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़े, ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर रखकर उसे डलिया से ढक कर पूजा अर्चना की गई।
तिगरीधाम मेले में उत्तर भारत का ऐतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेला देवोत्थान एकादशी पर विधिवत शुरू होगा। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा,पुलिस अधीक्षक डा.विपिन ताड़ा समेत अन्य पुलिस-प्रशासनिक,पत्रकार और जनप्रतिनिधि शुक्रवार को गंगा में दुग्धाभिषेक करके मेले का परंपरागत तरीके से शुभारंभ किया।
सं त्यागी
वार्ता
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