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भक्तिपूर्ण गानों से भावविभोर किया अनुराधा पौडवाल ने

भक्तिपूर्ण गानों से भावविभोर किया अनुराधा पौडवाल ने

..जन्मदिवस 27 अक्टूबर के अवसर पर ..
मुंबई 26 अक्टूबर (वार्ता) बॉलीवुड की मशहूर पार्श्वगायिका अनुराध पौडवाल ने अपने भक्तिपूर्ण गीतों के जरिये श्रोताओं के दिलों में खास पहचान बनायी है।

अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्तूबर 1952 को हुआ था।
बचपन से ही उनका रूझान संगीत की ओर था और वह पार्श्वगायिका बनने का सपना देखा करती थीं।
अपने सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने बॉलीवुड की ओर रूख किया।
हालांकि शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

अनुराधा पौडवाल ने वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म ‘अभिमान’ से अपने कैरियर की शुरुआत की।
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में उन्हें मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के
निर्देशन में एक संस्कृत के श्लोक गाने का अवसर मिला जिससे अमिताभ बच्चन काफी प्रभावित हुए।
वर्ष 1974 में अनुराधा पौडवाल को मराठी फिल्म ‘यशोदा’ में भी पार्श्वगायन करने का अवसर मिला।

वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म ‘कालीचरण’ में उनकी आवाज में “एक बटा दो दो बटा चार” उन दिनों बच्चों में काफी लोकप्रिय हुआ था।
इस बीच अनुराधा ने ‘आपबीती’, ‘उधार का सिंदूर’, ‘आदमी सड़क का’, ‘मैनें जीना सीख
लिया’, ‘जाने मन’ और ‘दूरियां’ जैसी बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में पार्श्वगायन किया लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई ख़ास फायदा नहीं पहुंचा।

     लगभग सात वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1980 में जैकी श्राॅफ और मीनाक्षी शेषाद्रि अभिनीत फिल्म ‘हीरो’ में लक्ष्मीकांत प्यारे लाल के संगीत निर्देशन में “तू मेरा जानू है तू मेरा दिलवर है” की सफलता के बाद अनुराध पौडवाल बतौर पार्श्वगायिका फिल्म इंडस्ट्री में कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गयीं।

वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म ‘उत्सव’ बतौर पार्श्वगायिका अनुराधा पौडवाल के कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी।
शशि कपूर के बैनर तले बनी इस फिल्म में अनुराधा पौडवाल को लक्ष्मीकांत प्यारे लाल के संगीत निर्देशन में “मेरे मन बजा मृदंग” जैसे गीत गाने का अवसर मिला जिसके लिये वह सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित की गयीं।

अनुराधा पौडवाल की किस्मत का सितारा वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म ‘आशिकी’ से चमका।
बेहतरीन गीत-संगीत से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने न सिर्फ अभिनेता राहुल राय ,गीतकार समीर और संगीतकार नदीम-श्रवण और पार्श्वगायक कुमार शानू को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया बल्कि अनुराधा पौडवाल को भी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।
फिल्म के सदाबहार गीत आज भी दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

नदीम-श्रवण के संगीत निर्देशन में अनुराधा पौडवाल की आवाज में रचा बसा “सांसो की जरूरत हो जैसे”, “नजर के सामने जिगर के पार”, “अब तेरे बिन जी लेंगे हम”, “धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना” , “ मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में” और “मेरा दिल तेरे लिये धड़कता है” श्रोताओं में काफी लोकप्रिय हुये।
उनकी आवाज ने फिल्म को सुपरहिट बनाने में अहम भूमिका निभायी।
फिल्म में अनुराधा पौडवाल को “नजर के सामने जिगर के पार” गीत के लिये सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका का फिल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ।

     ‘आशिकी’ की सफलता के बाद अनुराधा पौडवाल को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये।
इनमें ‘बागी’, ‘बहार आने तक’ .कुर्बान .साजन .साथी .फूल और कांटे तथा सड़क .जैसी बड़े बजट की फिल्में शामिल थी।
इन
फिल्मों की सफलता के बाद अनुराधा पौडवाल ने सफलता की नयी बुलंदियों को छुआ और एक से बढ़कर एक गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुंग्ध कर दिया।

नब्बे के दशक में अनुराधा पौडवाल ने निश्चय किया कि वह केवल टी.सीरीज द्वारा जारी भक्ति भावना से प्रेरित फिल्मों या अलबम के लिये ही पार्श्वगायन करेगी ।
इस क्रम में उन्होंने टी.सीरीज द्वारा जारी कई अलबमों के लिये पार्श्वगायन किया।
अनुराधा पौडवाल फिल्म इंडस्ट्री की पहली पार्श्वगायिका बनी जिन्हें कैसेट के कवर पर फिल्म अभिनेता या अभिनेत्रियों की तुलना में अधिक प्रमुखता के साथ दिखाया गया।

पार्श्वगायन के लिये चार बार उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
वर्ष 1985 में प्रदर्शित फिल्म उत्सव के गीत “मेरे मन में बजा मृदंग” के लिये उन्हें यह पुरस्कार दिया गया था।
इसके बाद वर्ष 1990 में फिल्म आशिकी के गीत “नजर के सामने जिगर के पार” वर्ष 1991 में दिल है कि मानता नहीं फिल्म के गीत “दिल है कि मानता नहीं ” और वर्ष 1992 में फिल्म बेटा के “धक धक करने लगा” के लिये अनुराधा पौडवाल सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयीं।

वर्ष 1989 में प्रदर्शित मराठी फिल्म ‘कलट नकलट’ के लिये वह सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी
सम्मानित की गयीं।
अनुराधा पौडवाल ने अपने तीन दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 350 फिल्मी/ गैर फिल्मी एलबम को अपनी आवाज दी।
अनुराधा पौडवाल आज भी अपनी मधुर आवाज से श्रोताओ को मंत्रमुग्ध कर रही हैं।

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