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भोजपुरी सिनमा की नयी इबारत लिखेगी मेंहदी लगा के रखना

भोजपुरी सिनमा की नयी इबारत लिखेगी मेंहदी लगा के रखना

पटना 06 फरवरी (वार्ता) सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और क्वीन काजल राघवानी की रोमांटिक जोड़ी से सजी फिल्म मेंहदी लगा के रखना के जरिये भोजपुरी सिनेमा के गौरवपूर्ण इतिहास को पुन: लौटाने की कोशिश की गयी है जिसमें सुपरहिट फिल्म ‘पटना से पाकिस्तान’ फेम निर्माता अनंजय रघुराज और संगीतकार से निर्देशक बने रजनीश मिश्रा ने सफलता सुपर सफतला हासिल की।
भोजपुरी फिल्मों के इतिहास में एक लंबे अंतराल के बाद ‘मेंहदी लगा के रखना’ के रूप में पारंपरिक और पारिवारिक भोजपुरी फिल्म प्रदर्शित हुयी है।
नदिया के पार ,हम आपके हैं कौन और दिलवाले दुल्हनियां ले जायेंगे जैसी फिल्मों की याद दिलाती मेंहदी लगा के रखना रजनीश मिश्रा की बतौर निर्देशक यह पहली फ़िल्म है लेकिन अपने इस पहले प्रयास में ही उन्होंने बेहतरीन पारिवारिक फिल्म दर्शकों के सामने प्रस्तुत की है ।
‘मेंहदी लगा के रखना’ रजनीश मिश्रा के सिनेमाई प्रतिभा का विस्‍तार है।
कैसे एक संगीतज्ञ लोक रागों को अपनी लोकप्रिय शैली का वियोजन सिनेमा के मनभावन दृश्‍यों को रचने में किया है, यह इस फिल्‍म में साफ नजर आता है।
कैसे लगभग सभी दृश्‍य नवीनता और भोजपुरी अहसासों के साथ शिद्दत से दिल में उतरते हैं और कैसे लगभग सारे कलाकारों का अभिनय अच्‍छी टाइमिंग और ठ‍हराव के साथ बेहतर हो जाता है।
खेसारी लाल यादव अपने करियर के सबसे उम्‍दा किरदार में नजर आ रहे हैं।
अभिनय के हर शेड में उन्होंने अपने किरदार से सबको प्रभावित किया है कॉमेडी और एक्शन तो खासकर के देखने लायक है ।
अपने रूमानी अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाली काजल राघवानी मेंहदी लगा के रखना में नये अंदाज में नजर आयी।
फिल्म में उन्होंने संगीत शिक्षिका का किरदार निभाया है जो निश्चित तौर पर दर्शकों को पसंद आयेगी।
भोजपुरी इंडस्‍ट्री में खलनायक के रूप में पहचाने जाने वाले अभिनेता अवधेश मिश्रा का अपने सकारात्‍मक किरदार में डूबना एक पिता के आत्मिक भाव को बढ़ाने वाला है।
वहीं संजय पांडे के तल्‍ख अंदाज भी सराहनीय हैं।
फिल्म में हास्य का अनूठा प्रयोग किया गया ।
फिल्म ‘मेंहदी लगा के रखना ’से भोजपुरी फिल्म जगत को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है क्योंकि अब यहां कोई द्विअर्थी गानों को पसंद नहीं करता और आप किसी को जबरदस्ती वैसी चीजें लंबे समय तक नहीं परोस सकते हैं ।
पिछले कुछ समय से भोजपुरी फिल्मों में से भोजपुरिया महक गायब करके केवल पश्चिमी सभ्यता दिख रही थी जिससे दर्शकों का लगाव भोजपुरी फिल्मों से भटक सा गया था ।
इन्हीं सभी मुद्दों को लेकर भोजपुरिया समाज को देखते हुए निर्माता अनंजय रघुराज ने यह फिल्म बनाई है जिसको की दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है ।
फिल्‍म के सारे पहलुओं को गौर करें तो पता चलता है कि भोजुपरी सिनेमा में प्रेम के दृश्‍यों को नए अंदाज में फिल्‍माया गया है।
अश्‍लीलता को दरकिनार कर रोमांस की अलग और इनोवेटिव प्रस्‍तुति इस फिल्‍म को और भी खास बनाती है।
उम्मीद है कि फिल्म कमाई के मामले में भी नया आयाम स्थापित करेगी ।
 

कहानी :

फिल्‍म की शुरूआत राजा (खेसारी लाल यादव) के उद्यम से होता है, जो निकम्‍मा और बेरोजगार है।
लेकिन हर पिता की तरह राजा के पिताजी रामनारायण (अवधेश मिश्रा) की चाहते हैं कि राजा सुधकर कोई काम काज करे, पर राजा हर काम को इतना उल्टा पलट करता कि नौकरी से निकाल दिया जाता, रामनारायण उसकी इन हरकतों से बहुत परेशान है ।
एक दिन राजा को एक खूबसूरत लड़की काजल (काजल राघवानी) मिल जाती और पता चलता की वो स्कूल में संगीत टीचर है, काजल के चक्कर राजा स्कूल में चपरासी की नौकरी करने लगता है, रामनारायण राजा के सुधरने और नौकरी करने से बहुत खुश है।
कुछ दिनों के बाद पूरा स्कूल स्वच्छ्ता अभियान पर जाता है जहां राजा काजल से अपने प्यार का इज़हार कर देता है, काजल को ये बहुत बुरा लगता और वो राजा को थप्पड़ मार देती है।
रामनारायण को पूरी बात पता चलती है और वो राजा का दिल हल्का करने के लिए उसको अपने एक मित्र के घर ले जाते जहां मित्र के बेटी की शादी है, राजा अपने पिता के मित्र के परिवार के सारे लोगो से मिलता है।
लेकिन उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता जब वो देखता है कि जिस लड़की की शादी में आया है वो कोई और नहीं बल्कि काजल है, जिसको वो प्यार करता है।
इसके बाद राजा वही पे रुकता है, और अपनी ही मेहबूबा की शादी की तैयारी में मदद करता फिर धीरे धीरे राजा की अच्छाईयों से काजल इतना प्रभावित हो जाती है और राजा को प्यार करने लगती है और जिस दिन काजल राजा से अपने प्यार का इज़हार करती है उसके दो दिन बाद ही उसकी बारात आने वाली होती है।
मुहब्बत और संस्कारों के भवर में पड़े राजा और काजल क्या फैसला करते इसी का ताना बाना है - मेहंदी लगा के रखना।

संगीत :

फिल्म में गीत संगीत भी उच्च कोटि का है जो की एकबार सुन लेने के बाद स्वतः ही जुबान पर आने लगेगा।
यहां भी रजनीश झा का काम कमाल का रहा है ।
फिल्म में गीत श्याम देहाती आज़ाद सिंह एवं प्यारेलाल यादव का है ।
वहीं अन्य कलाकार रितु सिंह और आनंद मोहन ने भी अपने अपने किरदारों को बेहद ही संजीदगी से जिया है ।
फिल्‍म के सारे गाने पहले ही हिट हो चुके हैं।

देखे या न देखे :- रेटिंग :- इस फिल्म को पांच में से चार स्टार (4*/5*) 

 

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