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दुनिया के किसी देश में नहीं उमड़ता आस्था का ऐसा जनसैलाब : गिरी

कुंभ नगर, 10 फरवरी (वार्ता) साधु संतो की जानी-मानी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कुंभ मेले को दुनिया का ऐसा इकलौता धार्मिक आयोजन बताया है जिसमें अास्था का ऐसा विशाल समंदर हिलोरें मारता दिखायी पड़े।     




       उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धार्मिक आयोजन की सफलता पर बधाई देते हुये श्री गिरि ने कहा कि दुनिया के किसी देश में ऐसा कोई आध्यात्मिक और धार्मिक पर्व नहीं है जहां करोड़ों की तादाद में श्रद्धालु एक साथ इकठ्ठा होकर पवित्र नदियों अथवा सरोवर में स्नान करते हों। उन्होंने कहा कि श्री योगी इस आयोजन के लिये बधाई के पात्र है जिन्होने जिस दिव्य और भव्य कुंभ की घोषणा की थी, उसे अक्षरश: सच कर दिखाया।



     कुंभनगर में रविवार को पत्रकारो से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेशाें में कुंभ की ब्रांडिंग और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों को निमंत्रण देने का परिणाम है कि कुंभ के दौरान ही मारीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जगन्नाथ और उनके साथ आए करीब 3000 हजार से अधिक विदेशी मेहमानों ने दिव्य और भव्य कुंभ का अवलोकन कर उसकी गरिम का बखान किया। इससे पहले 70 देशों के एक -एक प्रतिनिधि भी कुंभ मेले की तैयारी का जायजा ले चुका है। सभी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की इतने भव्य आयोजन की सफलता की भूरि भूरि प्रशंसा की।

     उन्होने कहा कि पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी तट पर अस्थायी बसी आध्यात्मिक नगरी दुनिया में सबसे निराली है। यहां विभिन्न संस्कृतियां एक ही पटल पर संगम करती हैं। इस पटल की यह विशेषता है कि लोग एक दूसरे की भाषा और संस्कृति से भले ही अनभिज्ञ हो, बावजूद इसके वे एक दूसरे की भावनाओं को अच्छी तरह समझते हैं।

अध्यक्ष ने बताया कि विश्व में ऐसा कोई मुल्क नहीं है जहां तीन नदियों के संगम में एक ही दिन (मौनी अमावस्या) पर पांच करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हों। ‘अनेकता में एकता’ की इससे बड़ी मिसाल कहीं देखने को नहीं मिलती। घाट पर अमीर-गरीब, राजा-रंक, वृद्ध-जवां, महिला और बच्चे सभी आस्था के वशीभूत हो पुण्य लाभ के लिए त्रिवेणी में गोता लगाते हैं।

    उन्होंने कहा, ‘कुंभ तेरे कितने रूप’। यहां आस्था का ऐसा समन्दर उमउता है जिसमें छुआछूत और ऊंच-नीच, ज्ञानी-अज्ञानी का भेद बह जाते हैं, रह जाती अगर कुछ तो सिर्फ एक पुण्य की एक डुबकी लगाने की चाहत । संगम में स्नान के लिए इतनी बड़ी जनसंख्या को देखकर लगता है आस्था का समन्दर हिलोंरे मार रहा है।

   श्री गिरी ने बताया कि प्रयागराज के अलावा कुंभ हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित किया जाता है लेकिन इसकी विशालता, भव्यता और आध्यात्मिकता की जो महत्ता प्रयाग की है, कोई दूसरी नहीं।

    प्रयागराज आध्यात्म का वह केन्द्र हैं जहां सतत आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह होता रहता है। यहां बिना निमंत्रण के श्रद्धालु एक नियति समय पर पहुंचते हैं और आस्था की डुबकी लगाने के बाद वह अपने गंतव्य को वापस लौट जाते हैं। वे यह नहीं सोचते कि उन्हें विस्तीर्ण रेती पर बसे अस्थायी आध्यात्मिक नगरी में कोई सुविधा मिलेगी भी या नहीं। दूर-दराज से कड़कडाती ठंड में संगम पहुंचने वाले श्रद्धालु खुले अम्बर के नीचे रात गुजारने में भी अपने को धन्य मानते हैं।

दिनेश प्रदीप

वार्ता



 

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