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महाशिवरात्रि स्नान पर एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में आस्था की डुबकी

महाशिवरात्रि स्नान पर एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में आस्था की डुबकी

कुम्भनगर, 04 मार्च (वार्ता) सम्पूर्ण विश्व में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले कुम्भ के आखिरी दिन महाशिवरात्रि के पर्व पर एक करोड़ 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित हो रही सरस्वती में आस्था की डुबकी लगाई।


        आधिकारिक सूत्रो ने सोमवार को यहां बताया कि कुम्भ के अंतिम स्नान के लिए विभिन्न घाटों पर मध्यरात्रि के बाद से लगातार स्नान होता रहा।  शाम पांच बजे तक एक करोड़ 10 लाख से अधिक श्रद्वालुओं ने त्रिवेणी के संगम में आस्था एवं पुण्य की डुबकी लगाई।

      महाशिवरात्रि के स्नान के लिए श्रद्वालुओं का आगमन शनिवार से ही शुरू हो गया था। रविवार प्रातः से शुरू हुआ श्रद्वालुओं का रेला कुम्भ के विभिन्न मार्गो पर आगमन देर शाम तक अनवरत जारी रहा। संयोग से इस बार महाशिवरात्रि पर्व सोमवार को है तथा इस भव्य और दिव्य कुम्भ के आखिरी स्नान पर्व होने के कारण भी श्रद्वालुओं की भीड कुम्भ क्षेत्र में पहुंची।

       महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा । स्नान को लेकर मेला प्रशासन द्वारा पूर्व स्नान पर्वो की भांति सुरक्षा के व्यापक बन्दोबस्त किये गये। स्नान घाटों पर महिला पुलिस से लेकर अर्धसैनिक बल मुस्तैद रहे। देश के अलग-अलग कोने से पहुंचे श्रद्वालु संगम में स्नान पश्चात अपने-अपने गंतव्यों को रवाना भी होते रहे। संगम में स्नान के बाद स्नानार्थी गऊ दान और विभिन्न अनुष्ठान कर पुण्यार्जन की कामना की।

      कुंभ में करीब आठ किलोमीटर के दायरे में फैले 40 घाटों पर इस स्नान पर्व पर पुनः एक बार फिर श्रद्धालुओं के आस्था का सैलाब उमड़ा। इस दौरान कुम्भ क्षेत्र में मां गंगे के जयघोष के साथ ही हर-हर महादेव के नारे भी गुंजायमान थे। स्नानार्थियों के वापसी पर उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिये मेला प्रशासन ने व्यापक बन्दोबस्त किये है। स्नानार्थियों को किसी भी तरह की कोई असुविधा न हो इसके लिये मेला क्षेत्र में तैनात पुलिस बल के साथ वालंटियर्स भी बड़े ही सौम्य और शिष्ट भाव से मार्गदर्शन करते रहे।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि महाशिवरात्रि स्नान पर्व का मुहूर्त रात्रि एक बजकर 26 मिनट पर लग गया था।  संगम तट पर हल्की बूंदा-बांदी और  सर्द हवाओं की परवाह किये बगैर श्रद्धालुओं ने “ हर-हर गंगे और हर-हर महादेव” का स्मरण करते मध्य रात्रि के बाद से ही आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी। ठंड पर आस्था भारी पड़ती नजर आयी। कल रात भारी वर्षा होने के कारण दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को रात गुजारने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा । किसी ने पुल के नीचे शरण ली तो  किसी ने कोने का सहारा लिया ।

       यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रुप में मान्यता प्राप्त, भारत की आध्यात्मिक सांस्कृतिक, सामाजिक एवं वैचारिक विविधताओं को एकता के सूत्र में पिरोने वाला यह कुम्भ भारतीय संस्कृति का द्योतक है। सम्पूर्ण भारत की संस्कृति की झलक कुम्भ में देखने को मिली है। कुम्भ काे लघु भारत कहा जाए तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। यहां अनेकता में एकता परलक्षित होती है। यहां चारों दिशाएं एकाकार होकर संगम में आस्था की डुबकी लगती हैं।

    विदाई की बेला में भी कुम्भ की आभा बरकरार है। संगम का विहंगम दृश्य अभी भी पहले जैसा ही बना हुआ है। संगम जाने वाले काली मार्ग, लाल मार्ग और त्रिवेणी मार्ग पर पैदल श्रद्धालुओं को भी चलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूर दराज से सिर पर गठरी और कंधे पर कमरी रखे, एक दूसरे का कपड़ा पकड़े ग्रामीण परिवेश के वृद्ध पुरुष, महिलायें, युवा सभी उम्र के श्रद्धालुओं का हुजूम संगम में डुबकी लगाने के लिए संगम पहुंचे। भारतीय जन-जीवन, आध्यात्मिक चिंतन और विभिन्न भारतीय संस्कृति की सरिता का संगम कुम्भ में दिखाई दिया।

     श्रद्धालुओं में गंगा स्नान के अलावा और कोई तमन्ना नहीं दिखाई दी। आठ से 10 किलोमीटर पैदल चलकर संगम पहुचने वाले श्रद्धालुओं को जहां जगह मिली स्नान के बाद न/न खाने की चिंता न और किसी सुविधा की आशा बस रेती पर थकावट दूर करने गमछा बिछाकर लेट गए। स्नान के बाद श्रद्धालुओं में इतनी थकावट देखी गई कि जो जहां जगह पाया बेसुध लेट गया।

      पारंपरिक देसी भीड़ में आधुनिकता और परंपरा दोनों का संगम दिखाई दिया। युवा जहां जींस में टैबलेट लेकर गंगा स्नान करने को आए तो बुजुर्ग एक धोती सहेजे और लाठी टेंकते ही संगम के किनारे पहुंचे। इस भीड़ में भारतीय संस्कार भी रचे बसे दिखाई दिए।

      मेलाधिकारी, पुलिस उपमहानिरीक्षक/पुलिस अधीक्षक कुम्भ समेत सभी अधिकारियों एवं पुलिस तथा पैरामिलिट्री फोर्स के जवान लगातार निगरानी करते रहे। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिये निःशुल्क शटल बसों का संचालन किया गया, जो कि पार्किंग स्थलों से परेड मैदान के निकट तक स्नानार्थियों/श्रद्वालुओं को लेकर आ और जा रही है।

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