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तीन नए कानूनों का लक्ष्य दंड नहीं, अपितु न्याय देना : प्रज्ञा

तीन नए कानूनों का लक्ष्य दंड नहीं, अपितु न्याय देना : प्रज्ञा

देहरादून, 13 मई (वार्ता) आगामी एक जुलाई से लागू होने वाले तीन नए आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 विषय पर सोमवार को केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के देहरादून स्थित पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा पुलिस मुख्यालय के सरदार पटेल भवन में एक मीडिया कार्यशाला ‘वार्तालाप’ का आयोजन किया।

इसमें पीआईबी की महानिदेशक प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि इन तीन नए कानूनों का लक्ष्य किसी को दंड देना नहीं, अपितु न्याय देना है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों को देश की सेना के मध्यनजर सशक्त बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून पूर्णतः नागरिकों पर केंद्रित है, जिसमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों को व्यापकता के साथ बनाया गया है।

संगोष्ठी में राज्य के पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने कहा कि संसद द्वारा पारित इन तीन नए कानूनों के माघ्यम से पहली बार व्यापक बदलाव किए गए हैं। ये क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के मुख्य अंग पुलिस, अभियोजन, जेल प्रणाली और न्यायपालिका को प्रभावित करेंगे। उन्होंने बताया कि नए आपराधिक कानूनों में काफी बदलाव किए गए हैं। जैसे भारतीय न्याय संहिता में 190 छोटे- बड़े बदलाव किए गए हैं। साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 360 छोटे-बड़े बदलाव किए गए हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 45 बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपने सभी अधिकारियों और पुलिस बल को इन कानूनों का प्रशिक्षण देना आरंभ कर दिया है।

श्री कुमार ने बताया कि राज्य स्तर पर कानूनों को लागू करने के छह समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां हैं जनशक्ति समिति, प्रशिक्षण समिति , सीसीटीएनएस समिति, इंफ्रास्ट्रक्चर समिति, पुलिस मैन्युअल समिति और जागरूकता समिति। इन समितियों ने नए कानूनों को लागू करने के लिए प्लान आफ एक्शन तैयार किया है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में फॉरेनसिक जांच को अत्यधिक प्राथमिकता दी गई है, जिससे सटिक और त्वतरित न्याय मिल सके।

"वार्तालाप" में विस्तार से जानकारी देते हुए उप महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) बरिंदरजीत सिंह ने कहा कि नए कानून पीड़ितों और नागरिकों को ज्यादा अधिकार देते हैं और न्याय व्यवस्था को समय सीमा में बांधने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि नए कानून तकनीकी तौर पर सशक्त हैं और नई तकनीकी के माध्यम से न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन नए कानूनों में गवाह की सुरक्षा की स्कीम का भी प्रवाधान है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के तहत फॉरेनसिक एविडेंस के माध्यम से कन्विक्शन रेट में इजाफा होगा।

कार्यक्रम में दूसरे विशेष वक्ता अपर पुलिस अधीक्षक, पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, नरेंद्रनगर शेखर सुयाल ने बताया कि पहले के कानूनों में लंबित मामलों की संख्या में बढ़ोतरी दर की समस्या को नए कानून सुधारेंगे। नए कानूनों को आतंकवाद सहित कई अपराधों पर केंद्रीत किया गया है। उन्होंने बताया कि नए कानूनों से आपराधिक न्याय प्रणाली के चार स्तंभ पीड़ित व आमजन, पुलिस, अभियोजन और न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि नए कानून नागरिकों को अधिकार देते हैं कि व्यक्ति अपने साथ हुए अपराध की शिकायत कहीं भी कर सकता है। नए कानूनों के तहत जब्ती के मामले में वीडियोग्राफी अब अनिवार्य कर दी गई है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता सहायक विवेचना अधिकारी जावेद अहमद ने तीन नए कानूनों के न्यायिक पक्ष को समझाया। उन्होंने कहा कि नए कानून का मकसद न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना है। साथ ही किस तरह से दोषसिद्ध दर में बढ़ोतरी हो वो भी इन कानूनों में विस्तार से बताया गया है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों मंे नए अपराध जैसे संगठित अपराध, आतंकवाद अपराध, भारत की अखंडता और संप्रभुता को अघात पहुंचाने वाले अपराध जोड़े गए हैं। नए कानून पीड़ितों को मुआवजा देने को भी प्रथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि विवेचना की समय सीमा भी इन कानूनों में अब तय कर दी गई है।

आभार पीआईबी देहरादून के उप निदेशक रोहित त्रिपाठी ने दिया।

इस मौके पर उत्तराखंड पुलिस के अपर महानिदेशक सीबीसीबाईडी डा. वी मुर्गेशन, अपर महानिदेशक कानून व्यवस्था एपी अंशुमन सहित पुलिस विभाग और पीआईबी के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

सुमिताभ.संजय

वार्ता

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