Thursday, Jan 23 2020 | Time 03:47 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • हिमाचल के चंबा जिले में भूकंप के झटके
  • पेरु बस दुर्घटना में छह की मौत, 20घायल
  • पाकिस्तान पश्चिम एशिया में शांति के पक्ष में :खान
लोकरुचि


आध्यात्म, वैराग्य और ज्ञान की ऊर्जा सतत प्रवाहित होती है संगम की रेत में

आध्यात्म, वैराग्य और ज्ञान की ऊर्जा सतत प्रवाहित होती है संगम की रेत में

प्रयागराज, 13 जनवरी (वार्ता) पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त:सलीला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी की रेत वैराग्य, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति से ओतप्रोत है।

तीर्थराज प्रयाग की महिमा का कोई अंत नहीं है। अरण्य और नदी संस्कृति के बीच जन्म लेकर ऋषियों-मुनियों की तपोभूमि के रूप में पंचतत्वों को पुष्पित-पल्लवित करने वाली प्रयागराज की धरती देश को हमेशा ऊर्जा देती रही है। इसके विस्तीर्ण रेती पर न/न जाने कितने ही साधु-संत,पुण्य आत्मा और ऋषि-मुनियों ने अपने पुण्य से सिंचित किया है।

माघ मेला हो या कुम्भ या फिर अर्द्ध कुंभ , यहां पंडालों में रामचरित मानस, श्री कृष्ण लीला, भागवत पाठ आदि का लगातार पाठ चलता रहता है । यहां श्रोता रेत पर ही बैठ कर कथा सुनते हैं । कथा अपने नियत समय पर शुरू होती और समय से ही समाप्त भी होती है।

श्रीदेवरहवा बाबा सेवा आश्रम पीठ के आचार्य रमेश प्रपन्न शास्त्री ने अन्नपूर्ण मार्ग स्थित शिविर में कहा कि संगम का कण-कण यज्ञ मय है। यहां रेत कण में सदियों से ऋषि मुनियों और देवताओं का चरण स्पर्श हुआ है। यहां के रेत कण केवल वैराग्य, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जावान ही नहीं है बल्कि यह आध्यात्मिक औषधि भी है। पहले संत-संन्यासी और

कल्पवासी इसी रेत को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करते हैं। उसके बाद त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। उनका मानना है कि उनके गुरू के चरण कभी इसी रेत पड़े हों। श्रद्धालु स्नान करने के बाद यहां की एक मुठ्ठी रेत को ससम्मान अपने साथ लेकर जाते हैं।

पद्मपुराण में प्रयाग क्षेत्र को यज्ञ भूमि कहा गया है। देवताओं द्वारा सम्मानित इस भूमि में थोड़ा भी दान का अनंत फल प्राप्त होता है। यह 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोभूमि है। इसीलिए यहां कल्पवास में भूमि पर शयन की बात कही गयी है। कल्पवासी एक माह तक रेती पर ही शयन करते हैं। इस दौरान संगम की रेत पर एक माह तक हवन, पूजा-पाठ, यज्ञ के साथ निरंतन कुछ न कुछ धार्मिक कार्य होते रहते हैं जिससे यहां की रेत आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी हुई है।

दिनेश विनोद

वार्ता

More News
पर्यटको की आमद से इटावा सफारी पार्क हुआ गुलजार

पर्यटको की आमद से इटावा सफारी पार्क हुआ गुलजार

17 Jan 2020 | 4:56 PM

इटावा, 17 जनवरी (वार्ता)उत्तर प्रदेश में चंबल के बीहड़ों में स्थित इटावा सफारी पार्क पर्यटकों को खूब भा रहा है। सफारी पार्क में गत 25 नंबवर से 15 जनवरी तक 34 हजार से अधिक पर्यटको ने अपनी मौजूदगी से सुखद एहसास कराया है।

see more..
योगी ने गोरखनाथ मंदिर में चढ़ायी खिचड़ी

योगी ने गोरखनाथ मंदिर में चढ़ायी खिचड़ी

15 Jan 2020 | 6:50 PM

गोरखपुर 15 जनवरी (वार्ता) सूर्य के बुधवार तड़के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही नाथ सम्प्रदाय के प्रसिद्ध शिवावतारी गोरक्षनाथ मंदिर में परम्परागत रूप से खिचड़ी चड़ाने का क्रम शुरू हो गया है।

see more..
बिहार में धूमधाम से मनायी जा रही मकर संक्रांति

बिहार में धूमधाम से मनायी जा रही मकर संक्रांति

15 Jan 2020 | 11:11 AM

पटना 15 जनवरी (वार्ता) बिहार में मकर संक्राति का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

see more..
आध्यात्म, वैराग्य और ज्ञान की ऊर्जा सतत प्रवाहित होती है संगम की रेत में

आध्यात्म, वैराग्य और ज्ञान की ऊर्जा सतत प्रवाहित होती है संगम की रेत में

13 Jan 2020 | 4:59 PM

प्रयागराज, 13 जनवरी (वार्ता) पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त:सलीला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी की रेत वैराग्य, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति से ओतप्रोत है।

see more..
मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा आज भी है बरकरार

मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा आज भी है बरकरार

13 Jan 2020 | 12:51 PM

पटना,13 जनवरी (वार्ता) मकर संक्रांति के दिन उमंग, उत्साह और मस्ती का प्रतीक पतंग उड़ाने की लंबे समय से चली आ रही परंपरा मौजूदा दौर में काफी बदलाव के बाद भी बरकरार है।

see more..
image