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जालौन का धार्मिक स्थल तुलसी चबूतरा उपेक्षा का शिकार

जालौन का धार्मिक स्थल तुलसी चबूतरा उपेक्षा का शिकार

जालौन 12 जनवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश के जालौन में महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल तुलसी चबूतरा प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो ध्वस्त होता जा रहा है ।

माधौगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम जगम्मनपुर बाजार में गोस्वामी तुलसीदास की विश्राम स्थली पर बना तुलसी चबूतरा प्रशासनिक अनदेखी के कारण नष्ट होता जा रहा है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान न दिया गया तो उसका अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विक्रम संवत 1657 में पंचनद संगम पर स्थित आश्रम में साधनारत तत्कालीन सिद्ध संत श्री मुकुंदवन (बाबा साहब) महाराज की प्रसिद्धि सुनकर रामचरितमानस रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जल मार्ग से पंचनद संगम पर आए। श्री बाबा साहब मंदिर के सामने मौजूद खड़े प्राचीन विशाल पीपल के वृक्ष के नीचे दोनों संतों का मिलन हुआ । उस समय से कुछ पूर्व मुगल बादशाह बाबर से युद्ध में पराजित हो कनार राज्य के विघटनोपरांत कनार धनी महाराज के वंशज महाराजा जगम्मनदेव अपने प्राचीन कनार दुर्ग से 3 किलोमीटर दूर दक्षिण में अपने नए किला का निर्माण करवा जगम्मनपुर गांव बसाने व जगम्मनपुर राज्य की स्थापना करने का उपक्रम कर रहे थे ।

तुलसीदास जी के आगमन की जानकारी होने महाराजा जगम्मनदेव अपने लाव लश्कर सहित संत शरण में पहुंचे और निर्माणाधीन जगम्मनपुर किला पधारने का आग्रह किया। संत महाराज मुकुंदवन (बाबा साहब) के कहने पर श्री तुलसीदास जगम्मनपुर पधारे और उन्होंने अपने हाथ से जगम्मनपुर के निर्माणाधीन किला की दैहरी रोपित की जो किला के प्राचीन प्रवेश द्वार पर आज भी सुरक्षित है।

तुलसीदास ने महाराजा जगम्मनदेव को भगवान शालिग्राम, दाहिना वर्ती शंख, एक मुखी रुद्राक्ष प्रदान किया । इस दौरान उन्होंने राजा द्वारा बसाये जा रहे गांव जगम्मनपुर में 14 दिन तक प्रवास किया। उनके धूनी रमाने के लिये राजा जगम्मनदेव ने अपने किला से 50 मीटर दूर पूर्वोत्तर दिशा में एक विशाल सुंदर पक्के चबूतरे का निर्माण कराया जो आज जर्जर ध्वस्त हालत में है।

प्रति वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शालिग्राम , दाहिना वर्ती शंख, एक मुखी रुद्राक्ष को सिंहासनारुण करवा कर जगम्मनपुर किला से आम लोगों के दर्शनार्थ तुलसी चबूतरा तक लाया जाता है। वर्ष में एक दिन इस ऐतिहासिक चबूतरा के आसपास थोड़ी बहुत साफ सफाई करवा दी जाती है शेष पूरे बर्ष भर इस पर गदहो, खच्चरों, सुअरो एवं आवारा गायों का कब्जा रहता है । बाजार के दुकानदारों एवं ग्राहकों की लघु शंका से निबृत्त होने का अड्डा बना रहता है। इस धार्मिक स्थल की अनदेखी एवं ग्रामीणों की अज्ञानता से इस पवित्र चबूतरे का अपमान होता है जो जनपद वासियों एवं स्थानीय लोगों का दुर्भाग्य है।

इस संदर्भ में भाजपा नेता एवं जगम्मनपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय द्विवेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर इस पवित्र स्थल का जीर्णोद्धार करवा कर इस चबूतरे पर गोस्वामी तुलसीदास जी की मूर्ति स्थापित कराने एवं चबूतरे के आसपास की जगह को स्वच्छ करवा इसके चारों ओर के परिक्रमा मार्ग को पक्का करवाने व ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को संरक्षित करने की मांग की है।

सं विनोद

वार्ता

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