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कैंसर के दो तिहाई मामले डीएनए कॉपिंग में गड़बड़ी से

कैंसर के दो तिहाई मामले डीएनए  कॉपिंग में गड़बड़ी से

वाशिंगटन 24 मार्च (वार्ता) वैज्ञानिकों ने ताजा शोध में पता लगाया है कि कैंसर के करीब दो तिहाई मामलाें का कारण सामान्य कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया के दौरान डीएनए काॅपिंग में आकस्मिक गलतियां हैं जबकि 29 प्रतिशत मामलों के लिए पर्यावरण और मात्र पांच प्रतिशत मामलों में आनुवांशिक कारण जिम्मेदार हैं। वैज्ञानिक जांस हाेपकिंस यूनिवर्सिटी के क्रिस्टेन टॉमसेटी और बर्ट वोगेल्सिटन ने ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित अपने शोध में कहा है कि अध्ययन के दौरान देखा गया कि कैंसर के दो तिहाई से अधिक मामलों में सामान्य कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया के दौरान डीएनए में हुयी अचानक खामियां जिम्मेदार हैं। वैज्ञानिकाें ने अध्ययन के दौरान 32 प्रकार के कैंसरों में गणितीय माॅडल का प्रयोग करते हुए जिनोम सिक्वेसिंग और इपिडेमिलाॅजिक डाटा का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्हें चौंकाने वाले नतीजे मिले। उन्होंने कहा कि इस दौरान देखा गया कि कैंसर के 66 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जिनसे बचा नहीं जा सकता क्योंकि ये मामले डीएनए कॉपिंग में अचानक हुयी गलतियों के कारण हाेते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रतिशत कैंसर के विभिन्न प्रकारों में अलग-अलग हैं। मसलन पेनक्रिया(पाचन ग्रंथि) के कैंसर में यह 77 प्रतिशत मामले और बच्चों में होने वाले कैंसर अधिकांश कैंसर के लिए डीएनए की यह गड़बड़ी जिम्मेदार है। लेकिन फेफड़े के कैंसर के दो तिहाई मामले के लिए पर्यावरण जिम्मेदार हैं और इसमें भी ध्रूमपान बड़ी वजह है। यह शोध वर्ष 2015 में किये गये एक अध्ययन पर आधारित है जिसमें वैज्ञानिकों ने कैंसर को “ बैड लक” करार देते हुए कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए डीएनए में आयी आक्समिक बड़बड़ियों के बारे प्रमुखता से सामने लाया था। इस अध्ययन का अनुसंधानकर्ताओं और डॉक्टरों ने आलोचना करते हुए कहा था कि इससे लोगों में कैंसर को लेकर गलत संदेश जायेगा। लोग इसे भाग्य भरोसे माानते हुए अपनी जीवनशैली के प्रति लापरवाह हो जायेंगे। मसलन वे ध्रूमपान से तौबा करने और कसरत को नियमित दिनचर्या में अपनाने, संतुलित भोजन ग्रहण करने एवं मोटापा कम करने को तरहीज नहीं देंगे। आशा आजाद वार्ता

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