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मौसम उपग्रह ‘इनसैट- 3डीएस’ सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित

मौसम उपग्रह ‘इनसैट- 3डीएस’  सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 17 फरवरी (वार्ता) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो ) ने एक महत्वपूर्ण मिशन के तहत श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से मौसम उपग्रह इनसैट- 3डीएस का शनिवार का प्रक्षेपण किया और 19 मिनट की उड़ान के बाद उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया।

इसरो सूत्रों ने बताया कि बताया कि 27.5 घंटे की उलटी गिनती के बाद, 420 टन वजनी और 51.7 मीटर लंबे जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी)-एफ14 रॉकेट ने इनसैट-3डीएस को लेकर आज शाम पांच बजकर 35 मिनट पर दूसरे लॉन्च पैड से शानदार उड़ान भरी। उन्नीस मिनट की उड़ान के बाद उपग्रह अपनी वांछित कक्षा में स्थापित हो गया।

इनसेट-3डीएस भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित किए जाने वाले तीसरी पीढ़ी के मौसम उपग्रह का मिशन है। इसे मौसम का अवलोकन करने, भविष्यवाणी और आपदा चेतावनी के लिए भूमि और महासागर सतहों की निगरानी करने के लिए डिजाइन किया गया है।इस उपग्रह से वर्तमान में संचालित इनसैट-3डी और इनसैट-3डीआर उपग्रहों के साथ मौसम संबंधी सेवाओं में वृद्धि होगी।

इसरो के मुताबिक, जीएसलवी रॉकेट से यह 16वां मिशन है। इससे पहले 15 मिशनों को अंजाम दिया जा चुका है, जिनमें से सिर्फ चार मिशन ही असफल हुए हैं।

इसरो के वैज्ञानिकों ने जीएसएलवी मिशन की सफलता के बाद खुशियों का इजहार करते हुए कहा,“ शरारती लड़के से जीएसएलवी अब एक परिपक्व और अनुशासित लड़का बन गया है।”जीएसएलवी रॉकेट को अतीत में इसके शानदार प्रदर्शन के लिए नॉटी बॉय का उपनाम दिया गया था।

सूत्रों के कहा,“ इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने जीएसलवी एफ 14 को "शरारती लड़का" करार दिया था क्योंकि यह अक्सर समस्याओं में फंसने के लिए जाना जाता है। इसकी विफलता दर 40 प्रतिशत है। अब तक के अपने कुल 15 अंतरिक्ष मिशनों में से, इसकी 40 प्रतिशत की विफलता दर है। उनमें से छह में समस्याओं का सामना करना पड़ा।”

उपग्रह समुद्र की सतह का अध्ययन करके अधिक सटीक, सटीक और सूचनात्मक मौसम पूर्वानुमान प्राप्त करने में मदद करेगा और सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदा की चेतावनी देने में सक्षम होगा।

आशा.संजय

वार्ता

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