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अध्यादेश के माध्यम से खेल विश्वविद्यालय बनाने की क्या जरूरत :विपक्ष

अध्यादेश के माध्यम से खेल विश्वविद्यालय बनाने की क्या जरूरत :विपक्ष

नयी दिल्ली 01 अगस्त (वार्ता) विपक्ष ने अध्यादेश के माध्यम से मणिपुर में राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय की स्थापना के औचित्य पर बुधवार को सरकार के समक्ष तीखा विरोध किया।

रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन ने इस वर्ष मई में राष्ट्रपति द्वारा जारी राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय अध्यादेश 2018 को निरस्त करने वाले सांविधिक संकल्प को पेश करते हुए कहा कि सरकार की अध्यादेश के माध्यम से विधायी कार्य करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रजातंत्र के लिए खराब है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इसके लिए अध्यादेश लाने की क्या जरूरत थी।

खेल एवं युवा मामलों के मंत्री कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने अध्यादेश का स्थान लेने वाले राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय विधेयक 2018 को सदन में विचार एवं पारित करने के लिए पेश किया। देश के विभिन्न स्थानों पर खेल विश्वविद्यालय के संबद्ध सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोले जाएंगे।

प्रेमचंद्रन ने कहा कि वह विधेयक का समर्थन करते हैं क्योंकि पटियाला या ग्वालियर के संस्थान स्नातक एवं स्नातकोत्तर की डिग्रियां देने तक सीमित हैं और अनुसंधान एवं विकास का काम नहीं हो रहा है। खेल विज्ञान, खेल प्रौद्योगिकी, खेल प्रबंधन और खेल प्रशिक्षण के बारे में पढ़ाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने खेल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विधेयक में अनेक प्रावधान किये गये हैं जिनसे केन्द्र सरकार का विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केन्द्र एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के काम में हस्तक्षेप करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है जिससे स्वायत्तता प्रभावित होती है। उन्होंने देश में खेलों का ढांचा मज़बूत करने और स्कूलों में खेल को पाठ्यक्रम का अभिन्न भाग बनाने पर जोर दिया।

भारतीय जनता पार्टी के अनुराग ठाकुर ने कहा कि देश के 21 लाख करोड़ रुपए के बजट में खेलों के लिए आवंटन बहुत कम है। जब पैसा नहीं होगा तो अच्छे खिलाड़ी कैसे पैदा होंगे। उन्होंने खेल मंत्री से कुछ तीखे सवाल भी किये। उन्होंने प्रदेश, जिला एवं ब्लाक स्तर पर खेलों का ढांचा, प्रतिभाअों की सूची तथा प्रशिक्षकों की उपलब्धता का अध्ययन करने पर जाेर दिया।

ठाकुर ने विदेशों में खिलाड़ियों पर हुए खर्च का विवरण जानना चाहा अौर कहा कि अगर इतना खर्च देश में व्यवस्था बनाने में होता तो किसी को प्रशिक्षण के लिए विदेश नहीं जाना पड़ता। ठाकुर ने खेल विश्वविद्यालय मणिपुर में बनाये जाने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मणिपुर से देश के बाकी जगहों के लोगों की आवाजाही बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। चर्चा अधूरी रही।

 

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